
झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर चल रहे छात्रों के लंबे आंदोलन के बीच हेमंत सोरेन सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने देर रात आठ अलग अलग नोटिफिकेशन जारी कर 44 भर्ती परीक्षाओं को रद्द कर दिया। इनमें JSSC CGL समेत ड्रग इंस्पेक्टर, असिस्टेंट प्रोफेसर, डिप्टी कलेक्टर, सिविल जज, असिस्टेंट इंजीनियर और फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर जैसे महत्वपूर्ण पदों से जुड़ी परीक्षाएं शामिल हैं।
23 दिन के छात्र आंदोलन के बाद सरकार का बड़ा कदम
JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्र लगातार आंदोलन कर रहे थे। करीब 23 दिनों से जारी इस आंदोलन के बीच सरकार ने परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया। इससे पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में JSSC CGL और आउटसोर्स एजेंसी TDPL से जुड़ी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की गई थी।
सरकार ने वर्ष 2014 से TDPL के माध्यम से आयोजित परीक्षाओं और उनसे जुड़ी भर्ती प्रक्रियाओं को भी जांच के दायरे में लिया है। TDPL द्वारा जारी परिणाम और उसके माध्यम से हुए चयन को लेकर भी सवाल उठे हैं।
CGL समेत इन पदों की परीक्षाएं रद्द
सरकार के फैसले का असर कई महत्वपूर्ण सरकारी भर्तियों पर पड़ा है। रद्द की गई परीक्षाओं में ड्रग इंस्पेक्टर, असिस्टेंट प्रोफेसर, डिप्टी कलेक्टर, डेंटल डॉक्टर, असिस्टेंट इंजीनियर, सिविल जज, एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर और फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर जैसी भर्तियां शामिल हैं।
इसके अलावा सरकारी पॉलीटेक्निक के व्याख्याता, वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी और सहायक वन संरक्षक समेत कई प्रशासनिक एवं तकनीकी पदों से जुड़ी परीक्षाएं भी रद्द की गई हैं।
17 परीक्षाओं की CID जांच, 6 परीक्षाएं स्थगित
सरकार ने भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की जांच के लिए भी बड़ा कदम उठाया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 17 परीक्षाओं को CID जांच के दायरे में रखा गया है, जबकि छह अन्य परीक्षाओं को स्थगित किया गया है। सरकार का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना बताया गया है।
सरकार की ओर से JPSC-JSSC से जुड़ी अनियमितताओं की सुनवाई के लिए हाईकोर्ट से फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का अनुरोध करने की बात भी कही गई है। इससे मामलों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।
दो महीने में रिपोर्ट देगी सुधार समिति
भर्ती परीक्षाओं की व्यवस्था में सुधार के लिए सरकार ने एक समिति का गठन भी किया है। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। यह समिति JPSC और JSSC की परीक्षा एवं भर्ती प्रक्रिया में आवश्यक सुधारों पर काम करेगी और करीब दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।
इसके साथ ही आयोगों में आंतरिक सतर्कता प्रकोष्ठ गठित करने का भी प्रावधान किया गया है, ताकि भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया में होने वाली अनियमितताओं पर निगरानी रखी जा सके।
छात्रों ने आंदोलन को बताया बड़ी जीत
सरकार के फैसले के बाद आंदोलन कर रहे छात्रों में खुशी देखी गई। छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो समेत आंदोलन से जुड़े कई छात्रों ने परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले का स्वागत किया। छात्रों की प्रमुख मांगों में विवादित परीक्षाओं को रद्द करना और भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच शामिल थी।
हालांकि छात्रों की सभी मांगें पूरी होने का दावा नहीं किया गया है। आंदोलन से जुड़े कुछ छात्र अभी भी पूरे मामले की CBI जांच की मांग पर अड़े हुए हैं। उनका कहना है कि सिर्फ परीक्षाएं रद्द करने से कथित गड़बड़ियों की पूरी सच्चाई सामने नहीं आएगी।
सफल अभ्यर्थियों के सामने नया संकट
सरकार के फैसले से उन अभ्यर्थियों की चिंता भी बढ़ गई है, जिन्होंने विवादित परीक्षाओं में सफलता हासिल की थी। JSSC CGL में चयनित उम्मीदवारों ने भी परीक्षा रद्द किए जाने के विरोध में प्रदर्शन किया और सवाल उठाया कि यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो सफल अभ्यर्थियों का क्या दोष है।
रिपोर्टों के अनुसार CGL परीक्षा रद्द होने से करीब दो हजार सफल अभ्यर्थियों के भविष्य पर अनिश्चितता पैदा हुई है। अभ्यर्थी सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग कर रहे हैं कि उनकी मेहनत और चयन का आगे क्या होगा।
भर्ती व्यवस्था में सुधार की बड़ी चुनौती
झारखंड सरकार के इस फैसले से राज्य की भर्ती व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। एक तरफ आंदोलन कर रहे छात्रों को सरकार के कदम से राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर सफल अभ्यर्थियों के सामने भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
अब सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि रद्द की गई परीक्षाओं के लिए आगे क्या व्यवस्था बनाई जाती है और नई भर्ती प्रक्रिया कितनी पारदर्शी होती है। साथ ही जांच में यदि किसी स्तर पर अनियमितता या जिम्मेदारी सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है, इस पर भी नजर रहेगी।
फिलहाल सरकार ने जांच, सुधार समिति और निगरानी तंत्र के जरिए भर्ती प्रक्रिया में सुधार का संकेत दिया है। वहीं छात्र संगठन मामले की स्वतंत्र जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर आगे भी आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं।
- Jharkhand-44-Recruitment-Exams-Cancelled-JSSC-JPSC-CGL-Student-Protest








