
अमेरिका में आज होने वाले मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दो साल के कार्यकाल की सबसे बड़ी राजनीतिक परीक्षा माने जा रहे हैं। इन चुनावों में अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के दोनों सदनों, प्रतिनिधि सभा और सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के बहुमत पर संकट मंडरा रहा है। वर्ष 2024 में राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बाद ट्रम्प के नेतृत्व में रिपब्लिकन पार्टी ने व्हाइट हाउस के साथ-साथ कांग्रेस के दोनों सदनों पर भी नियंत्रण हासिल किया था। अब दो साल बाद मतदाता उनके प्रशासन के कामकाज, आर्थिक नीतियों, महंगाई, आव्रजन व्यवस्था और विदेश नीति को लेकर अपना फैसला सुनाने जा रहे हैं। अमेरिकी मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के बीच आयोजित होते हैं और इनमें राष्ट्रपति का पद सीधे दांव पर नहीं होता, लेकिन इनका राजनीतिक महत्व बेहद बड़ा होता है। इस बार सभी 435 प्रतिनिधि सभा सीटों और सीनेट की 35 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं। इसके अलावा कई राज्यों में गवर्नर पद के लिए भी मतदान किया जा रहा है। रिपब्लिकन पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने मौजूदा बहुमत को बचाए रखना है, जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी की कोशिश कांग्रेस के कम से कम एक सदन पर नियंत्रण हासिल करने की है। Ballotpedia+2
प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत बेहद मामूली है। चुनाव से पहले सदन में रिपब्लिकन के पास 218 सीटें हैं, जबकि डेमोक्रेट्स के पास 214 सीटें हैं और कुछ सीटें रिक्त हैं। वहीं सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी 53-47 के प्रभावी बहुमत के साथ मौजूद है। डेमोक्रेट्स को दोनों सदनों में नियंत्रण हासिल करने के लिए कम से कम चार सीटों का शुद्ध लाभ आवश्यक है। ऐसे में कुछ प्रमुख राज्यों और प्रतिस्पर्धी निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजे पूरे चुनाव की दिशा तय कर सकते हैं। चुनाव प्रचार के दौरान महंगाई, आम लोगों की जीवन-यापन लागत, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाएं, आव्रजन नीति और ईरान के साथ अमेरिका के संघर्ष जैसे मुद्दे प्रमुख रहे हैं। ट्रम्प प्रशासन की आर्थिक नीतियों और जनता के बीच उनकी लोकप्रियता में आई गिरावट को भी रिपब्लिकन पार्टी के लिए चुनौती माना जा रहा है। रॉयटर्स/इप्सोस के सर्वेक्षण के मुताबिक ट्रम्प की अप्रूवल रेटिंग लगभग 32 प्रतिशत के करीब पहुंच गई थी। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार डेमोक्रेट्स के प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल करने की संभावना मजबूत मानी जा रही है, जबकि सीनेट की स्थिति अधिक करीबी और अनिश्चित बनी हुई है। हालांकि अंतिम फैसला मतगणना और चुनावी नतीजों के बाद ही स्पष्ट होगा। यदि रिपब्लिकन पार्टी दोनों सदनों में अपना बहुमत गंवा देती है, तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लिए अपने कार्यकाल के अगले दो साल में राजनीतिक और विधायी फैसले लागू करना पहले की तुलना में अधिक कठिन हो सकता है। डेमोक्रेटिक पार्टी प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल करती है तो उसे संसदीय समितियों का नियंत्रण, जांच शुरू करने और प्रशासनिक अधिकारियों को समन जारी करने जैसी महत्वपूर्ण शक्तियां मिल सकती हैं। वहीं सीनेट में डेमोक्रेट्स का बहुमत होने पर ट्रम्प प्रशासन के न्यायिक और अन्य प्रमुख नियुक्तियों को मंजूरी मिलने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। बजट, सरकारी खर्च, ऋण सीमा और नई नीतियों को लेकर व्हाइट हाउस तथा कांग्रेस के बीच टकराव बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। हालांकि रिपब्लिकन बहुमत खोने के बावजूद ट्रम्प राष्ट्रपति पद पर बने रहेंगे। उनके पास वीटो की शक्ति, कार्यकारी आदेश जारी करने और विदेश नीति तथा आव्रजन जैसे क्षेत्रों में व्यापक अधिकार मौजूद रहेंगे। इसलिए उन्हें पूरी तरह शक्तिहीन राष्ट्रपति कहना संवैधानिक रूप से सही नहीं होगा, लेकिन राजनीतिक रूप से उनकी स्थिति कमजोर हो सकती है और उन्हें अपने फैसलों के लिए डेमोक्रेट्स के साथ समझौता करना पड़ सकता है। इसी वजह से इन चुनावों को ट्रम्प के लिए उनके राष्ट्रपति कार्यकाल के अंतिम दो वर्षों की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण जनमत संग्रह माना जा रहा है।








