उमरिया | राकेश दर्दवंशी की रिपोर्ट
उमरिया में सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि यह वीडियो आरटीओ कार्यालय से जुड़ा हुआ है, जिसमें एक ऐसी गाड़ी नजर आ रही है जिसके आगे नंबर प्लेट लगी है, लेकिन पीछे नंबर प्लेट नहीं है।
चौंकाने वाली बात यह है कि इसी गाड़ी के जरिए आरटीओ कार्यालय में शासकीय कार्य किए जाने का दावा किया जा रहा है। वीडियो को लेकर यह भी कहा जा रहा है कि वाहन किसी परिवीक्षाधीन आरटीओ अधिकारी से संबंधित है। हालांकि, इस दावे की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इस मामले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—जब नियमों का पालन कराने वाली संस्था के भीतर ही नियमों की अनदेखी हो रही हो, तो आम जनता से सख्ती क्यों? शहरवासियों का कहना है कि छोटे-छोटे नियमों के उल्लंघन पर आम लोगों के चालान काटे जाते हैं, लेकिन यदि विभाग के भीतर ही ऐसी लापरवाही सामने आती है, तो यह दोहरे मापदंड को दर्शाता है।
स्थानीय लोगों में इस मुद्दे को लेकर आक्रोश देखा जा रहा है। उनका कहना है कि अगर उनकी गाड़ी में नंबर प्लेट अधूरी हो, तो तुरंत कार्रवाई होती है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब अधिकारी या उनसे जुड़े लोग नियमों का पालन नहीं करते, तो उन पर कार्रवाई क्यों नहीं होती?
वहीं, एक और आरोप यह भी सामने आ रहा है कि संबंधित अधिकारी कार्यालय में पर्याप्त समय नहीं दे रहे हैं, जिससे कर्मचारियों पर काम का दबाव बढ़ता है और अव्यवस्था की स्थिति बनती है। इससे यह मामला केवल एक वायरल वीडियो तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे सिस्टम की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर रहा है।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही लोगों की प्रतिक्रियाएं भी तेजी से सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे विभागीय लापरवाही बता रहे हैं, तो कुछ इसे सुधार का अवसर मान रहे हैं।
अब नजर इस बात पर है कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है। जरूरत है निष्पक्ष जांच की और यदि अनियमितता पाई जाती है, तो जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं, ताकि नियम सभी पर समान रूप से लागू हो सकें—चाहे वह आम नागरिक हो या कोई अधिकारी।
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