यूपी में बाढ़ से निपटने की व्यापक तैयारी, जून से 18 मंडलों में सक्रिय होंगे नियंत्रण कक्ष

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने इस वर्ष मानसून के दौरान बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम से कम करने और जनहानि को शून्य के करीब रखने के उद्देश्य से व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के तहत सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग पूरे प्रदेश में बाढ़ प्रबंधन को लेकर युद्ध स्तर पर कार्य कर रहा है। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि बारिश के मौसम में किसानों की फसलों और ग्रामीण क्षेत्रों को होने वाले नुकसान को न्यूनतम रखा जाए और आपदा की स्थिति में त्वरित राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित किया जाए।

प्रदेश में बाढ़ की निगरानी और त्वरित कार्रवाई के लिए सभी 18 मंडलों में एकीकृत बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित किए जा रहे हैं, जिन्हें 31 मई तक पूरी तरह तैयार कर लिया जाएगा। ये नियंत्रण कक्ष 1 जून से सक्रिय हो जाएंगे और 15 जून से 15 अक्टूबर तक 24 घंटे लगातार कार्य करेंगे। इन केंद्रों के माध्यम से जलस्तर की रियल टाइम निगरानी की जाएगी और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इसके लिए संबंधित जिलों और मंडलों को आपस में सीधे जोड़ा जा रहा है ताकि सूचना का आदान-प्रदान तेजी से हो सके और राहत कार्यों में किसी प्रकार की देरी न हो।

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बाढ़ से बचाव के लिए नदियों और नालों की सफाई पर भी बड़े पैमाने पर काम किया गया है। विभाग के अनुसार अब तक प्रदेश में 16 हजार किलोमीटर से अधिक लंबाई में नालों की सिल्ट सफाई पूरी की जा चुकी है, जिससे बारिश के दौरान जल निकासी व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में मदद मिलेगी। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में ड्रेनेज सिस्टम को मजबूत किया जा रहा है ताकि जलभराव की समस्या को रोका जा सके। इसके साथ ही तटबंधों को सुरक्षित करने के लिए भी तेजी से काम किया जा रहा है और लगभग चार हजार किलोमीटर लंबाई के तटबंधों को मजबूत किया जा चुका है।

प्रदेश में नदियों के किनारे बसे गांवों और कृषि भूमि को कटाव से बचाने के लिए भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके तहत कई संवेदनशील स्थानों पर पत्थर की पिचिंग और जियो-बैग्स का उपयोग किया जा रहा है ताकि तटबंधों की मजबूती बढ़ाई जा सके और नदी के कटाव से होने वाले नुकसान को रोका जा सके। इस दिशा में करीब 300 बाढ़ सुरक्षा परियोजनाओं पर काम चल रहा है, जिन्हें 15 जून 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

सरकार ने इस पूरी व्यवस्था में स्थानीय स्तर पर भी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए गांवों में बाढ़ सुरक्षा समितियों का गठन शुरू किया है। इन समितियों में ग्राम प्रधान, लेखपाल, जूनियर इंजीनियर और स्थानीय स्वयंसेवकों को शामिल किया जा रहा है, जो आपदा की स्थिति में तुरंत सूचना देने और राहत कार्यों में सहयोग करने का काम करेंगे। इससे प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच समन्वय मजबूत होगा और आपदा प्रबंधन अधिक प्रभावी बन सकेगा।

सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग का कहना है कि इस पूरी तैयारी का उद्देश्य केवल बाढ़ से बचाव नहीं बल्कि एक ऐसी प्रणाली विकसित करना है जिससे हर आपदा की स्थिति में तेजी से प्रतिक्रिया दी जा सके। सरकार का दावा है कि इस बार मानसून में बाढ़ प्रबंधन की व्यवस्था पहले से कहीं अधिक मजबूत और संगठित होगी, जिससे जनहानि को लगभग शून्य तक लाने और किसानों को न्यूनतम नुकसान पहुंचाने में सफलता मिलेगी।

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    Rashel Kachwah Rajput

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