
ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी सीनेट में एक प्रस्ताव पारित कर पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से ईरान के खिलाफ किसी भी नई सैन्य कार्रवाई को रोकने की अपील की गई है। प्रस्ताव के समर्थकों का कहना है कि मध्य पूर्व में किसी नए युद्ध से क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ सकती है और इसके गंभीर वैश्विक परिणाम सामने आ सकते हैं। इस कदम को अमेरिका के भीतर युद्ध विरोधी भावनाओं और कूटनीतिक समाधान की मांग के रूप में देखा जा रहा है।
सीनेट में पारित इस प्रस्ताव ने ईरान संकट को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। कई सांसदों का मानना है कि सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत और कूटनीति के रास्ते पर जोर दिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि किसी भी बड़े सैन्य निर्णय से पहले कांग्रेस की भूमिका और मंजूरी को महत्व दिया जाना चाहिए ताकि देश को लंबे और महंगे संघर्ष में न धकेला जाए।
इसी बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो शांति प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पहुंचे हैं। माना जा रहा है कि उनकी यह यात्रा क्षेत्रीय सहयोगियों को संभावित शांति समझौते और तनाव कम करने की पहल के लिए तैयार करने के उद्देश्य से की जा रही है। अमेरिका चाहता है कि खाड़ी देशों का समर्थन लेकर ईरान के साथ बढ़ते तनाव को नियंत्रित किया जाए और किसी व्यापक संघर्ष की संभावना को कम किया जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में कूटनीतिक प्रयासों की सफलता पूरे मध्य पूर्व की स्थिरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगी। यदि वार्ता आगे बढ़ती है तो क्षेत्र में तनाव कम होने की उम्मीद बढ़ सकती है, लेकिन यदि बातचीत विफल रहती है तो संघर्ष और गहरा सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय सहयोगियों के अगले कदमों पर टिकी हुई हैं।
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