
वृंदावन: एक बार फिर दुनिया के धार्मिक नक्शे पर अपनी अलग पहचान बनाने की ओर बढ़ रहा है। छटीकरा मार्ग स्थित अक्षयपात्र फाउंडेशन परिसर में बन रहे चंद्रोदय मंदिर का साउथ ब्लॉक अब पूरी तरह तैयार हो चुका है और इसके लोकार्पण की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं।
करीब 8 एकड़ भूमि पर विकसित यह प्रोजेक्ट 70 मंजिला और लगभग 212 मीटर ऊंचे भव्य मंदिर के रूप में आकार ले रहा है, जिसे दुनिया का सबसे ऊंचा मंदिर बताया जा रहा है। तैयार हो चुका साउथ ब्लॉक इस विशाल परियोजना का पहला बड़ा चरण है, जिसने ही श्रद्धालुओं और आगंतुकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
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इस हिस्से में भगवान श्रीश्री वृंदावनचंद्र का दिव्य मंदिर स्थापित है, साथ ही विशाल सभागार, प्रसाद व्यवस्था और भोजनालय जैसी सुविधाएं भी विकसित की गई हैं। मंदिर का डिजाइन आधुनिक और पारंपरिक भारतीय शिल्प का अनोखा संगम पेश करता है। प्रबंधन की योजना है कि आगामी लोकार्पण कार्यक्रम को बेहद भव्य बनाया जाए, जिसमें देश के शीर्ष नेतृत्व को भी आमंत्रित करने की तैयारी है। वहीं, मुख्य मंदिर की आधारशिला भी जल्द रखे जाने की संभावना जताई जा रही है।
पूरी परियोजना का उद्देश्य केवल एक मंदिर निर्माण नहीं, बल्कि ब्रज की आध्यात्मिक विरासत को एक ही परिसर में जीवंत रूप देना है। यहां बरसाना, गोवर्धन और वृंदावन के स्वरूपों के साथ 12 पवित्र वन भी विकसित किए जा रहे हैं। मंदिर के चारों ओर बहने वाली कृत्रिम यमुना नदी और घाट श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण होंगे, जहां भक्त यमुना पूजन और परिक्रमा का अनुभव कर सकेंगे। पूरी संरचना 511 मजबूत पिलरों पर आधारित है, जो इस भव्य निर्माण की मजबूती को दर्शाते हैं।
2014 में शुरू हुई यह परियोजना अब धीरे-धीरे अपने भव्य स्वरूप की ओर बढ़ रही है, और वृंदावन को एक वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में इसे एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
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