इंदौर में ‘जहर’ बनकर उतरा पानी और खामोश है ‘राजभवन’: क्या मध्यप्रदेश का राज्यपाल हाउस सिर्फ वीआईपी मेहमाननवाजी का अभेद्य किला है?

सिकल सेल एनीमिया के नाम पर सिर्फ इवेंट मैनेजमेंट? मासूमों की मौत और बढ़ते अपराध पर क्यों मौन साधे हैं राज्यपाल मंगूभाई पटेल? क्या लाल कालीन कीशाहीके आगे फीकी पड़ गई जनता की चीखें?

विशेष रिपोर्ट: मध्यप्रदेश कीआर्थिक राजधानीइंदौर आज मातम के साये में है। दूषित पानी ने कई परिवारों के चिराग बुझा दिए हैं। आधिकारिक आंकड़े कुछ भी कहें, लेकिन सड़कों पर आक्रोश और घरों में पसरा सन्नाटा सरकार की विफलता की कहानी खुद बयां कर रहा है। लेकिन इस पूरी त्रासदी के बीच सबसे बड़ा सवाल सूबे के संवैधानिक मुखिया पर उठ रहा है। क्या मध्यप्रदेश काराजभवनकेवल शाही आरामगाह बनकर रह गया है?

राजभवन: विलासिता का केंद्र या संवैधानिक रक्षक?

जनता पूछ रही है कि जब इंदौर में दूषित पानी से मौतों का तांडव मच रहा था, तब राजभवन से एक सख्त संदेश क्यों नहीं निकला? क्या राज्यपाल का काम सिर्फ फाइलें पलटना और लाल कालीन पर स्वागत स्वीकार करना है? आरोप लग रहे हैं कि राज्यपाल हाउस अब केवलपहुंचवाले लोगों के लिए अपॉइंटमेंट का एक ऐसा किला बन गया है, जहां आम आदमी की फरियाद दीवारों से टकराकर वापस जाती है।

सिकल सेल एनीमिया: जनसेवा या सिर्फफोटोऑप‘?

राज्यपाल मंगूभाई पटेल अक्सर सिकल सेल एनीमिया को लेकर बड़ेबड़े अभियान चलाने का दावा करते हैं। लेकिन हकीकत यह है कि आदिवासी अंचलों में आज भी यह बीमारी जानलेवा बनी हुई है। क्या ये अभियान केवल अखबारों की सुर्खियों औरदिखावेके लिए हैं? जब इंदौर जैसी बड़ी त्रासदी पर राजभवन नहीं जागा, तो दूरदराज के गांवों की योजनाओं का क्रियान्वयन कैसे सही हो रहा होगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है।

बढ़ता क्राइम और संवैधानिक चुप्पी

मध्यप्रदेश में अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। बहनबेटियों की सुरक्षा और आम नागरिक का सुकून सवालों के घेरे में है। राज्यपाल, जो राज्य की कानूनव्यवस्था का संरक्षक माना जाता है, उनकी इस चुप्पी ने अपराधियों के हौसले बुलंद कर दिए हैं। क्या राजभवन कीएसीहवाओं ने बाहर की तपन को महसूस करना बंद कर दिया है?

जनता के चुभते सवाल:

     इंदौर कांड पर एक्शन क्यों नहीं? मुख्यमंत्री अधिकारियों को निलंबित कर रहे हैं, लेकिन राज्यपाल ने अब तक रिपोर्ट तलब कर कड़ा रुख क्यों नहीं अपनाया?

     शाही ठाठबाट कब तक? क्या राजभवन की भव्यता और शाही खानपान जनता के टैक्स के पैसों पर सिर्फराजशाहीको जीवित रखने का माध्यम है

     प्रचार बनाम परिणाम: सिकल सेल एनीमिया और अन्य योजनाओं का प्रचार तो खूब होता है, लेकिन जमीनी स्तर पर मौतें क्यों नहीं रुक रहीं?

लोकतंत्र मेंसंवैधानिक पदजिम्मेदारी के लिए होते हैं, केवल शोभा बढ़ाने के लिए नहीं। अगर इंदौर के पीड़ितों को न्याय और सुरक्षा का आश्वासन राजभवन से नहीं मिलता, तो जनता की नजर में यहकिलाअपनी प्रासंगिकता खो देगा। मध्यप्रदेश जाग रहा है, क्या राजभवन जागेगा?

 

  • gaurav singh rajput

    gaurav singh rajput

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