बारिश से पहले 84 जर्जर निजी भवन बने जानलेवा खतरा, नगर निगम और जिला प्रशासन की सुस्ती पर उठे सवाल

बुरहानपुर/ राजू सिंह राठौड़: बारिश का मौसम शुरू हो चुका है और बुरहानपुर शहर में जर्जर निजी मकान लोगों की जान के लिए खुला खतरा बने हुए हैं। नगर निगम ने ऐसे 84 निजी भवनों की पहचान कर मकान मालिकों को नोटिस जारी किए हैं, लेकिन सवाल यह है कि जब खतरा पहले से साफ दिख रहा था तो अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

प्रशासन की ढिलाई किसी बड़ी दुर्घटना को न्योता दे सकती है। नगर निगम के सर्वे में शहर के 84 निजी मकान और भवन जर्जर हालत में पाए गए हैं। निगम का कहना है कि सभी भवन मालिकों को नोटिस जारी कर उन्हें स्वयं भवन हटाने या सुरक्षित करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, दो भवन हटाने के दावों के बावजूद बाकी जर्जर इमारतों पर कार्रवाई की रफ्तार बेहद धीमी है, जिससे नगर निगम और जिला प्रशासन की गंभीरता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

लोगों और राहगीरों की सुरक्षा को लेकर चिंता

बारिश के दौरान जर्जर भवनों के गिरने का खतरा और बढ़ जाता है। ऐसे में इन भवनों के आसपास रहने वाले लोगों और राहगीरों की सुरक्षा को लेकर चिंता गहरी है। नगर निगम और जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है कि नोटिस जारी करने तक सीमित न रहकर तुरंत सख्त कार्रवाई करें, ताकि किसी भी लापरवाही की कीमत किसी की जान से न चुकानी पड़े।

लोगों से भी अपील की जा रही है कि जर्जर भवनों के आसपास अनावश्यक आवाजाही से बचें, लेकिन असली जिम्मेदारी प्रशासन की है कि वह समय रहते खतरा खत्म करे,”हमारे पास जर्जर भवनों की सूची है। कुछ भवनों को नोटिस दिया जा चुका है और बाकी भवनों को भी नोटिस देकर उन्हें गिराने की कार्रवाई की जाएगी।

जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल

उधर कांग्रेस जिलाध्यक्ष रिंकू टाक ने नगर निगम और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि शहर में कई ऐसे जर्जर भवन हैं जो कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं।

उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इन्हें नहीं हटाया गया तो जनहानि की आशंका बनी रहेगी। रिंकू टाक ने कहा कि वे स्वयं कलेक्टर से मिलकर सभी खतरनाक जर्जर भवनों को तत्काल गिराने की मांग करेंगे।

भवन मालिकों के विरुद्ध कार्रवाई

प्रशासन का दावा है कि नोटिस के बाद भी कार्रवाई नहीं करने वाले भवन मालिकों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। लेकिन शहरवासियों का कहना है कि सिर्फ चेतावनी और कागजी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा।

नगर निगम और जिला प्रशासन को तुरंत सख्त कदम उठाने होंगे, ताकि बारिश के मौसम में किसी भी प्रकार की जनहानि न हो और जर्जर भवन किसी की जान न ले सकें।

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  • Manisha Gupta

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