MP में ‘हरित क्रांति’ पर ब्रेक नैनोयूरिया और ड्रोन योजना में आखिर सुस्ती क्यों?

भोपाल | विशेष संवाददाता

मध्य प्रदेश को कृषि कर्मण अवार्ड दिलाने वाले किसानों के भविष्य पर अब नीतिगत सुस्ती का साया मंडरा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजनाएं नैनो यूरिया, पीएम-प्रणाम और नमो ड्रोन दीदी जो न केवल किसानों की लागत घटाने बल्कि सरकार के हजारों करोड़ रुपए बचाने के लिए बनाई गई हैं, वे सूबे में प्रशासनिक फाइलों के बीच उलझी नजर आ रही हैं।

सवाल यह उठ रहा है कि क्या एमपी का मार्केटिंग फेडरेशन (मार्फेड) और संबंधित विभाग नहीं चाहते कि प्रदेश का किसान हाईटेक हो?

करोड़ों की बचत, फिर भी बेरुखी?

केंद्र सरकार की पीएम-प्रणाम योजना का सीधा लक्ष्य रासायनिक उर्वरकों पर दी जाने वाली सब्सिडी के बोझ को कम करना है। अगर मध्य प्रदेश में नैनो यूरिया का उपयोग बढ़ता है, तो सरकार के हजारों करोड़ रुपए बच सकते हैं। लेकिन धरातल पर मार्फेड की सुस्ती यह संकेत दे रही है कि पारंपरिक खाद के बड़े खेल को बदलने की इच्छाशक्ति की कमी है।

ड्रोन दीदी योजना: मार्कफेड MD की मेज पर रुकी रफ्तार!

प्रधानमंत्री की ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने और खेती में कीटनाशकों के सटीक छिड़काव के लिए शुरू की गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मार्कफेड और कृषि विभाग इसे मिशन मोड पर लें, तो नैनो यूरिया का छिड़काव आसान होगा और पैदावार में भारी बढ़ोतरी होगी। मगर चर्चा है कि विभाग के भीतर ही इन आधुनिक तकनीकों को लेकर एक ‘अघोषित विरोध’ है।

प्रमुख बिंदु: आखिर क्यों जरूरी है ये बदलाव?

  • पैदावार में वृद्धि: नैनो यूरिया सीधे पौधों की पत्तियों पर काम करता है, जिससे फसल की गुणवत्ता और मात्रा दोनों बढ़ती हैं।
  • मिट्टी की सेहत: पारंपरिक यूरिया से मिट्टी बंजर हो रही है, जबकि नैनो यूरिया पर्यावरण के अनुकूल है।
  • सब्सिडी का बोझ: पीएम-प्रणाम योजना से बचने वाले करोड़ों रुपए राज्य के कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर में लगाए जा सकते हैं।

क्या मध्य प्रदेश सरकार और मार्कफेड के अधिकारी प्रधानमंत्री के उस सपने को साकार नहीं करना चाहते, जिसमें किसान कम लागत में दोगुनी आय प्राप्त करे? तकनीक का विरोध आखिर किसके फायदे के लिए है?

किसानों का सवाल: हमें आधुनिक सुविधा कब?

किसानों का कहना है कि एक तरफ प्रधानमंत्री ड्रोन और नैनो यूरिया की बात करते हैं, वहीं स्थानीय स्तर पर अधिकारी अभी भी पुराने ढर्रे पर चल रहे हैं। यदि मार्कफेड सक्रियता दिखाए, तो न केवल खाद की किल्लत खत्म होगी, बल्कि मध्य प्रदेश ‘हरित क्रांति 2.0’ का नेतृत्व कर सकता है।

सरकार को यह समझना होगा कि नैनो यूरिया और ड्रोन तकनीक का विरोध सीधे तौर पर किसान की उन्नति का विरोध है। मार्कफेड को अपनी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लानी होगी ताकि ‘पीएम-प्रणाम’ जैसी योजनाओं का लाभ सीधे सरकारी खजाने और किसान की जेब तक पहुंचे।

  • gaurav singh rajput

    gaurav singh rajput

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