
अनूपपुर: एमपी–छत्तीसगढ़ सीमा के वन क्षेत्रों में चल रहे अवैध खनन और स्टोन क्रेशर गतिविधियों से स्थानीय आदिवासी समुदाय पर गंभीर असर पड़ा है। जंगलों और जल स्रोतों पर सीधा प्रभाव पड़ने से खेती, पशुपालन और पारंपरिक वन उपज प्रभावित हो रही है।
प्रकृति के साथ हो रही छेड़छाड़
स्थानीय लोग बताते हैं कि विस्फोट और पेड़ों की कटाई से वन क्षेत्र सिकुड़ रहा है, कई कुएं और नाले सूख रहे हैं, और स्वास्थ्य समस्याएं जैसे सांस की बीमारियां, खांसी, आंखों में जलन बढ़ रही हैं। धूल और प्रदूषण से बच्चों, बुजुर्गों और पशुधन की हालत भी खराब हो रही है।
ग्रामीणों का विरोध प्रदर्शन
ग्रामीणों ने कई सारे गांवों में विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की है, लेकिन शिकायत करने वालों को दबाव और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते कदम नहीं उठाए, तो यह पर्यावरणीय मुद्दा सामाजिक संघर्ष में बदल सकता है।
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