
सागर/मध्य प्रदेश – भक्ति, शक्ति और दृढ़ संकल्प का एक अनूठा संगम आज सागर जिले के गौरझामर में देखने को मिला। प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक रखने वाले आयुष और तनिष्क ने कठिन 3000 किलोमीटर पैदल नर्मदा परिक्रमा सफलतापूर्वक पूर्ण कर ली है। लगभग 5 माह के लंबे अंतराल के बाद जब वे अपने नगर लौटे, तो पूरा क्षेत्र उनके स्वागत में उमड़ पड़ा।
फूल-मालाओं और जयकारों से गूंजा नगर
आयुष और तनिष्क की वापसी पर गौरझामर के नागरिकों ने ढोल-नगाड़ों और ‘नर्मदे हर’ के जयघोष के बीच उनका भव्य स्वागत किया। ग्रामीणों ने दोनों युवाओं को फूल-मालाएं पहनाईं और श्रीफल भेंट कर अभिनंदन किया। परिजनों के लिए यह क्षण अत्यंत भावुक कर देने वाला था, क्योंकि युवावस्था की चकाचौंध को छोड़ उन्होंने आध्यात्मिक मार्ग चुना।
विधायक बृज बिहारी पटेरिया ने दी बधाई
इस अवसर पर विधायक बृज बिहारी पटेरिया ने कहा:
“आधुनिक युग में युवाओं के भीतर धर्म और अध्यात्म के प्रति ऐसी अटूट श्रद्धा देखना अत्यंत प्रेरणादायी है। आयुष और तनिष्क ने न केवल अपने परिवार का, बल्कि पूरे गौरझामर क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है। माँ रेवा का आशीर्वाद इन पर सदैव बना रहे।”
कठिन सफर और अटूट विश्वास
मां नर्मदा की परिक्रमा को हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। आयुष और तनिष्क ने 150 दिनों से अधिक समय तक पैदल चलकर इस पावन यात्रा को संपन्न किया। ठंड, दुर्गम रास्ते और लंबी दूरी की चुनौतियों को पार करते हुए उनकी सकुशल वापसी अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा बनी है।
नगर में हर्ष का माहौल
नगरवासियों का कहना है कि यह केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि गौरव की बात है कि गौरझामर की नई पीढ़ी अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़ी हुई है। सभी क्षेत्रवासियों ने मेहरबान सिंह के परिवार को बधाई देते हुए दोनों युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
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