
भोपाल (मंत्रालय): सचिवालय की जिन दीवारों ने कभी उनके आदेशों को नीतियों में बदलते देखा, आज उन्हीं सुरक्षा घेरों ने उनके अस्तित्व पर ‘वैधता’ का प्रश्नचिह्न लगा दिया है। हाल ही में एक वरिष्ठ सेवानिवृत्त महिला IAS अधिकारी के साथ मंत्रालय (वल्लभ भवन) के प्रवेश द्वार पर हुई घटना ने प्रशासनिक गलियारों में ‘डिग्निटी आफ्टर ड्युटी’ (कर्तव्य के बाद गरिमा) पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है।
जब ‘नियम’ बने ‘अपमान’ का आधार
ब्रांडवानी सूत्रों के अनुसार, मंत्रालय परिसर स्थित बैंक शाखा में अपने व्यक्तिगत कार्य हेतु पहुँचीं पूर्व वरिष्ठ महिला आईएएस अधिकारी को सुरक्षाकर्मियों ने ‘एंट्री प्रोटोकॉल’ का हवाला देकर रोक दिया। वे खुद वर्षों तक सत्ता के बड़े पदों पर रहने के बावजूद, प्रवेश पत्र (पास) न होने के कारण उन्हें उसी जगह पर रुकना पड़ा, जहाँ कभी उनका ही हुक्म चलता था।
IAS एसोसिएशन में उबाल
‘विशेष पहचान पत्र’ की मांग ने इस घटनाक्रम की गूँज IAS एसोसिएशन के डिजिटल मंचों पर स्पष्ट सुनाई दी जा रही है, मध्य प्रदेश शासन के सेवानिवृत्त अधिकारियों ने इसे व्यक्तिगत पीड़ा नहीं, बल्कि प्रशासनिक कैडर के सम्मान से जुड़ा एक उचित विषय बताया है।
सेवानिवृत्त के बाद गरिमा और पहचान का सेतु
मध्य प्रदेश शासन के सेवानिवृत्त अधिकारियों के पास एक स्थायी ‘डिजिटल एक्सेस कार्ड’ होना चाहिए। पूर्व वरिष्ठ लोक सेवकों के लिए मंत्रालय में प्रवेश की प्रक्रिया को ‘अपमानजनक’ के बजाय ‘सुगम’ और सरल बनाया जाए, जिससे सेवानिवृत्ति के साथ ही विभाग और अधिकारी का संबंध पूरी तरह औपचारिक व्यावसायिक हो जाना चाहिए।
इस प्रशासनिक कुव्यवस्था को देखते हुए मुख्य सचिव कार्यालय ने इस पर तुरंत संज्ञान लिया है। प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि ‘सोमवार’ तक इस संबंध में नई गाइडलाइंस या स्पेशल पास की व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकती है, ताकि सुरक्षा और सम्मान के बीच एक संतुलन स्थापित हो सके।
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