
भोपाल/ग्वालियर: मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद में वित्तीय अनियमितताओं का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। महालेखाकार (AG) ग्वालियर की ऑडिट रिपोर्ट ने डॉ. धीरेंद्र कुमार पांडेय के कार्यकाल में करोड़ों रुपये के घोटाले का खुलासा किया है। RTI एक्टिविस्ट पीयूष प्रताप सिंह द्वारा की गई शिकायतों और RTI से प्राप्त इस रिपोर्ट ने विभाग में हड़कंप मचा दिया है।
₹18.71 करोड़ का निष्फल व्यय
सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में तकनीकी खामियों और समन्वय की कमी के चलते 18,71,62,810 रुपये का निष्फल व्यय किया गया। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, यह राशि सीधे ‘निष्फल व्यय’ की श्रेणी में आती है।
बिना टेंडर ₹1.84 करोड़ का बंदरबाँट
पिछले वर्ष ‘नदी महोत्सव’ के दौरान नियमों का उल्लंघन कर म.प्र. के सरकारी विभाग “माध्यम” को बिना किसी खुली निविदा के करोड़ों का भुगतान किया गया।
राजस्व को ₹32.74 लाख का नुकसान
ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि कार्य पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया द्वारा किए जाते, तो सरकार के 32.74 लाख रुपये बच सकते थे। यह राशि चहेती फर्मों को लाभ पहुँचाने के लिए खर्च की गई।
बिना सत्यापन करोड़ों के बिल पास
मध्य प्रदेश माध्यम के भंडार क्रय नियमों का उल्लंघन करते हुए, सामग्री की उपलब्धता जाँचे बिना करोड़ों के बिलों का भुगतान किया गया।
बैंक खातों में सरकारी धन की ‘पार्किंग’
वित्तीय वर्ष 2013-14 से 2018-19 के बीच सरकारी योजना की राशि को बैंक खातों में जमा रखा गया, जो केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों का उल्लंघन है।
विभाग के तर्कों को AG ने किया खारिज
ग्वालियर में महालेखाकार कार्यालय ने इन गड़बड़ियों पर विभाग के जवाबों को खारिज कर दिया, क्योंकि किसी भी स्तर पर नियमों का पालन नहीं किया गया था। इस ऑडिट रिपोर्ट ने प्रदेश की राजनीति में हड़कंप मचा दिया है और भ्रष्टाचार के इन आरोपों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग तेज़ हो रही है।
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