रीवा में कलेक्टर के समर्थन में उतरे लोग, मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन

रीवा| में कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी के समर्थन में सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। रीवा कलेक्टर समर्थन ज्ञापन के जरिए लोगों ने कलेक्टर की कार्यशैली को जनहित में बताया और प्रशासनिक सुधारों की सराहना की। ज्ञापन में कहा गया कि जिले में लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक ढिलाई पर अब सख्ती दिखाई देने लगी है, जिससे आम जनता को राहत मिल रही है।

प्रशासनिक सख्ती से बदली व्यवस्था

ज्ञापन में सामाजिक कार्यकर्ताओं और संगठनों ने कहा कि कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी के कार्यभार संभालने के बाद रीवा जिले की प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पहले कई सरकारी कार्यालयों में अधिकारी और कर्मचारी समय पर नहीं पहुंचते थे, जिससे आम लोगों को छोटे-छोटे कामों के लिए भी लंबे समय तक परेशान होना पड़ता था।
ज्ञापनकर्ताओं के अनुसार कलेक्टर द्वारा लगातार औचक निरीक्षण, जनसुनवाई और जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसका असर यह हुआ कि सरकारी कार्यालयों में अनुशासन बढ़ा और लंबित मामलों के निराकरण में तेजी आई। लोगों का कहना है कि अब आम नागरिकों को अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद दिखाई देने लगी है। सामाजिक संगठनों ने यह भी कहा कि प्रशासनिक सुधारों के कारण कई ऐसे अधिकारी और कर्मचारी असहज महसूस कर रहे हैं, जो लंबे समय से मनमानी कार्यशैली के अभ्यस्त थे। यही वजह है कि कुछ लोग कलेक्टर के खिलाफ माहौल बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री से कार्यकाल पूरा कराने की मांग

ज्ञापन में मुख्यमंत्री मोहन यादव से मांग की गई कि कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी को रीवा में उनका तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा करने दिया जाए। ज्ञापनकर्ताओं ने कहा कि ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ काम कर रहे अधिकारियों को शासन का सहयोग मिलना चाहिए। लोगों का कहना है कि प्रशासनिक सुधारों का असर अब जिले के विकास कार्यों और जनसेवाओं में भी दिखाई देने लगा है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोगों को सरकारी कामों के लिए पहले की तुलना में कम परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ज्ञापन की प्रतिलिपि मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव सामान्य प्रशासन विभाग, प्रमुख सचिव राजस्व विभाग, कमिश्नर रीवा संभाग और कलेक्टर रीवा को भी भेजी गई है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद जिले में प्रशासनिक कार्यशैली और जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी जिले में प्रशासनिक सुधार तभी प्रभावी माने जाते हैं, जब उनका सीधा लाभ आम जनता तक पहुंचे। रीवा में सामने आया यह मामला प्रशासन और जनता के बीच बढ़ते विश्वास को भी दर्शाता है।

रीवा में कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी के समर्थन में सामने आया जनसमर्थन जिले की प्रशासनिक स्थिति पर बड़ा संकेत माना जा रहा है। सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने स्पष्ट किया है कि वे प्रशासनिक सख्ती और पारदर्शिता के पक्ष में हैं। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि शासन स्तर पर इस ज्ञापन को लेकर क्या निर्णय सामने आता है।

ब्यूरो रिपोर्ट: अरविंद तिवारी

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