
नई दिल्ली: ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर भारतीय वायुसेना के एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने कहा कि भारत की संस्कृति हमेशा से “जियो और जीने दो” की रही है, लेकिन जब देश की शांति की इच्छा को कमजोरी समझा जाए और संयम को असमर्थता माना जाए, तब कार्रवाई अनिवार्य हो जाती है। उन्होंने कहा कि जब भारत जवाब देता है तो वह आधा-अधूरा नहीं बल्कि पूरी तरह निर्णायक, वैध और संतुलित होता है, और यही ऑपरेशन सिंदूर में देखने को मिला।
एयर मार्शल भारती ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर आतंकवादियों और उनके समर्थन तंत्र के खिलाफ एक सटीक और संतुलित सैन्य प्रतिक्रिया थी। उन्होंने कहा कि 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में निर्दोष नागरिकों की हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया था। उन लोगों को वापस नहीं लाया जा सकता, लेकिन यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर उसी संकल्प की दिशा में उठाया गया कदम था।
एयर मार्शल ने बताया कि अभियान शुरू होने से पहले सेना को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे और तीनों सेनाओं को पूरी ऑपरेशनल स्वतंत्रता प्रदान की गई थी। उन्होंने कहा कि इस पूरे अभियान की मूल भावना “जॉइंटनेस” यानी तीनों सेनाओं के बीच तालमेल रही। भारतीय वायुसेना, थलसेना और नौसेना ने संयुक्त रणनीति के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में मौजूद आतंकी ढांचे को निशाना बनाया।
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उन्होंने कहा कि जैसे ही पहला हथियार अपने लक्ष्य पर लगा, उसी समय साफ हो गया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। एयर मार्शल भारती के मुताबिक इस अभियान में हर लक्ष्य, हर समय और हर हथियार का चयन बेहद सूक्ष्म योजना के तहत किया गया था ताकि हमला घातक भी हो और पूरी तरह सटीक भी।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत ने संघर्ष विराम इसलिए स्वीकार किया क्योंकि उसके सभी सैन्य उद्देश्य पूरे हो चुके थे। उनका कहना था कि भारत की लड़ाई आतंकवादियों और उनके नेटवर्क से थी, लेकिन जब पाकिस्तान ने आतंकवाद का खुला समर्थन करते हुए जवाबी सैन्य कार्रवाई शुरू की, तब भारत ने आत्मरक्षा में कठोर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय कार्रवाई के बाद विरोधी पक्ष को भारी नुकसान उठाना पड़ा, जिसके बाद संघर्ष विराम का अनुरोध किया गया।
एयर मार्शल भारती ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने आधुनिक युद्ध में वायु शक्ति की निर्णायक भूमिका को फिर से साबित किया है। उन्होंने बताया कि इस अभियान ने नेटवर्क आधारित युद्ध प्रणाली, प्रिसीजन टार्गेटिंग और एकीकृत कमांड एवं कंट्रोल सिस्टम की क्षमता को भी प्रमाणित किया। साथ ही इस ऑपरेशन से भविष्य के युद्धों के लिए कई महत्वपूर्ण सबक मिले हैं, जिनमें साइबर क्षमता, मानव रहित प्रणालियों और अंतरिक्ष आधारित तकनीक में अधिक निवेश की आवश्यकता प्रमुख है।
उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भारतीय वायुसेना तेजी से आगे बढ़ रही है और स्वदेशी तकनीकों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है। एयर मार्शल ने कहा कि देश की संप्रभुता और सुरक्षा को चुनौती देने वाली किसी भी ताकत को भारतीय वायुसेना करारा जवाब देने के लिए हर समय तैयार है। उन्होंने कहा, “कोई दूरी इतनी बड़ी नहीं, कोई गहराई इतनी ज्यादा नहीं और कोई आयाम ऐसा नहीं जिसे भारतीय वायुसेना नियंत्रित न कर सके।”
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- Mistake India’s Peace for Weakness at Your Own Risk Air Marshal Bharati’s Tough Message to Pakistan







