
लखनऊ/अकील सिद्दीकी की खास रिपोर्ट: मां के लिए उसकी बेटी सबसे बड़ी जिम्मेदारी और सबसे बड़ी चिंता होती है। जब तक बेटी सुरक्षित घर न लौट आए, तब तक मां का मन आशंकाओं से घिरा रहता है। लेकिन उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में बदले माहौल ने माताओं की इस चिंता को काफी हद तक कम कर दिया है। मातृ दिवस के अवसर पर कई महिलाओं ने बताया कि अब बेटियां देर रात भी घर लौटें तो पहले जैसी घबराहट महसूस नहीं होती।
लखनऊ की रहने वाली रजनी त्रिपाठी बताती हैं कि उनकी 15 वर्षीय बेटी स्कूल के सांस्कृतिक कार्यक्रमों के कारण कई बार देर से घर लौटती है, लेकिन अब उन्हें पहले जैसा डर नहीं लगता। उनका कहना है कि सड़कों पर पुलिस की सक्रियता और लगातार गश्त से मनचलों में डर बना है, जिससे बेटियां सुरक्षित महसूस करती हैं।
त्रिवेणी नगर निवासी कंचन दीक्षित का कहना है कि पहले महिलाओं और किशोरियों को घर से बाहर निकलने में असुरक्षा का माहौल महसूस होता था, लेकिन अब अपराधियों में कार्रवाई का डर दिखाई देता है। इसी वजह से परिवार अपनी बेटियों को ज्यादा आत्मविश्वास के साथ बाहर भेज पा रहे हैं।
वहीं ममता निगम कहती हैं कि उनकी बेटी शाम को कोचिंग जाती है और पहले देर होने पर लगातार चिंता बनी रहती थी, लेकिन अब पुलिस की नियमित गश्त और त्वरित सहायता से सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है। अयोध्या निवासी ज्योतिमा सिंह भी मानती हैं कि कानून व्यवस्था में सुधार के कारण माताओं का भरोसा बढ़ा है। उन्होंने कहा कि अब जरूरत पड़ने पर तुरंत पुलिस सहायता मिल जाती है, जिससे बेटियों की सुरक्षा को लेकर भरोसा मजबूत हुआ है।
ललिता प्रदीप का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा केवल पुलिस व्यवस्था से नहीं बल्कि समाज की सोच से भी जुड़ी होती है। बेटियों को सम्मान मिलने और अपराधियों पर सख्ती से कार्रवाई होने के कारण अब समाज में सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है।महिला सुरक्षा को लेकर चलाए गए अभियानों, सड़कों पर बढ़ी पुलिस मौजूदगी, एंटी रोमियो स्क्वॉड और त्वरित कार्रवाई जैसी व्यवस्थाओं ने प्रदेश में सुरक्षा का माहौल मजबूत किया है। यही कारण है कि आज कई माताएं अपनी बेटियों को शिक्षा, करियर और सपनों की ओर बेखौफ बढ़ते देख रही हैं।
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