
मैहर: मां शारदा मंदिर प्रबंधन समिति में कथित आर्थिक अनियमितताओं और भ्रष्टाचार को लेकर आम आदमी पार्टी के जिला विधिक प्रकोष्ठ अध्यक्ष आनंद श्रीवास्तव ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों से मंदिर समिति में वित्तीय गड़बड़ियां और प्रशासनिक अनियमितताएं जारी हैं, लेकिन कार्रवाई केवल दुकानदारों और बकाएदारों तक सीमित रखी जा रही है।
उन्होंने कहा कि हाल ही में कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में मंदिर समिति से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय केवल दुकानों के बकाया किराए और वसूली पर जोर दिया गया। आनंद श्रीवास्तव ने कहा कि जिला कलेक्टर विदिशा मुखर्जी द्वारा बकाया वसूली को लेकर सख्ती दिखाना स्वागत योग्य है, लेकिन यदि कार्रवाई सिर्फ छोटे दुकानदारों तक सीमित रही तो यह अधूरी मानी जाएगी।
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AAP नेता ने आरोप लगाया कि मंदिर समिति से जुड़े कुछ प्रभावशाली लोगों ने प्रशासन का ध्यान दुकानों के बकाया की ओर केंद्रित कर वास्तविक भ्रष्टाचार से ध्यान हटाने की कोशिश की है। उनका कहना है कि यदि 10 वर्षों में दुकानों का बकाया करीब 4 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, तो मंदिर समिति के भीतर कथित वित्तीय गड़बड़ियों, चोरी और अपारदर्शी संचालन की जांच भी उतनी ही जरूरी है।
उन्होंने अमानती सामान गृह मामले को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि संभावित मिलीभगत का मामला प्रतीत होता है। उन्होंने मांग की कि मंदिर समिति के सभी ठेके, आय-व्यय, दान राशि, कर्मचारियों की नियुक्तियां और पिछले वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए।
आनंद श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि समिति में कई कर्मचारियों की नियुक्ति और सेवा रिकॉर्ड तक स्पष्ट नहीं हैं। कुछ लोग लंबे समय से प्रभावशाली पदों पर बने हुए हैं, लेकिन उनके अभिलेख व्यवस्थित रूप से उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में केवल दुकानदारों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन वास्तव में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना चाहता है, तो जांच का दायरा व्यापक होना चाहिए और मंदिर समिति के भीतर चल रही कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
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