
बीजिंग: दुनिया की राजनीति और वैश्विक व्यापार पर असर डालने वाली अमेरिका और चीन के शीर्ष नेतृत्व की अहम बैठक बुधवार से चीन की राजधानी बीजिंग में शुरू हो गई। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारतीय समयानुसार सुबह करीब 7:30 बजे बीजिंग के प्रतिष्ठित “ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल” में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का औपचारिक स्वागत किया। यह मुलाकात ऐसे समय हो रही है जब दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार, तकनीक, ताइवान और ईरान जैसे मुद्दों पर तनाव चरम पर है।
दो दिन के इस हाई-प्रोफाइल दौरे को अमेरिका-चीन संबंधों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। बैठक के दौरान दोनों नेताओं के बीच व्यापार युद्ध, टैरिफ विवाद, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ताइवान, ईरान संकट और अरबों डॉलर के संभावित व्यापारिक समझौतों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। वैश्विक बाजारों और रणनीतिक हलकों की नजर इस बात पर टिकी हुई है कि क्या यह बैठक दोनों देशों के रिश्तों में नरमी ला पाएगी या तनाव और बढ़ेगा।
रेड कार्पेट स्वागत, चीन ने दिखाया बड़ा कूटनीतिक सम्मान
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप बुधवार देर रात एयर फोर्स वन विमान से बीजिंग पहुंचे। चीन ने उनका स्वागत बेहद भव्य अंदाज में किया। रेड कार्पेट समारोह के दौरान सफेद यूनिफॉर्म पहने सैकड़ों चीनी युवाओं ने अमेरिकी और चीनी झंडे लहराकर उनका स्वागत किया। ट्रंप विमान की सीढ़ियां उतरते हुए हाथ हिलाते और समर्थकों का अभिवादन करते दिखाई दिए।
इस बार चीन ने ट्रंप के स्वागत के लिए उच्च स्तर का प्रोटोकॉल अपनाया है। चीन के उपराष्ट्रपति और वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी को इस यात्रा को विशेष महत्व देने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। शाम को दोनों नेता स्टेट बैंक्वेट में भी शामिल होंगे, जबकि ट्रंप ऐतिहासिक “टेंपल ऑफ हेवन” का दौरा भी करेंगे, जो यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है।
एलन मस्क से टिम कुक तक, ट्रंप के साथ पहुंचे बड़े कारोबारी
इस दौरे की सबसे खास बात यह है कि अकेले चीन नहीं पहुंचे हैं। उनके साथ अमेरिका की कई बड़ी टेक और निवेश कंपनियों के प्रमुख भी बीजिंग पहुंचे हैं। इनमें एलोन मस्क, जेन्सेन हुआंग, टिम कुक और लैरी फिंक जैसे बड़े नाम शामिल हैं। यह दौरा केवल राजनीतिक नहीं बल्कि आर्थिक और तकनीकी रणनीति का भी हिस्सा है। ट्रंप चीन पर अमेरिकी कंपनियों के लिए बाजार और अधिक खोलने का दबाव बना सकते हैं। अमेरिका लंबे समय से चीन पर अमेरिकी कंपनियों के साथ असमान व्यवहार और तकनीक हस्तांतरण को लेकर सवाल उठाता रहा है।
व्यापार युद्ध और टैरिफ सबसे बड़ा मुद्दा
अमेरिका और चीन के बीच पिछले कुछ वर्षों में व्यापारिक संबंध लगातार तनावपूर्ण रहे हैं। अमेरिकी प्रशासन ने चीनी उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाए थे, जिसके जवाब में चीन ने भी अमेरिकी वस्तुओं पर जवाबी शुल्क लगाए। इसका असर वैश्विक सप्लाई चेन और बाजारों पर पड़ा। दोनों देश पिछले साल हुए अस्थायी टैरिफ समझौते को आगे बढ़ाने पर बातचीत कर सकते हैं। ट्रंप प्रशासन चाहता है कि चीन अमेरिकी कृषि, टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए अपने बाजार में ज्यादा अवसर दे।
AI और टेक्नोलॉजी पर बढ़ी प्रतिस्पर्धा
बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और हाई-टेक सेक्टर भी प्रमुख मुद्दा रहेगा। चीन तेजी से AI और सेमीकंडक्टर तकनीक में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है, जबकि अमेरिका चीनी टेक कंपनियों पर प्रतिबंध और निर्यात नियंत्रण की नीति अपना रहा है। AI की वैश्विक दौड़ अब अमेरिका और चीन के बीच नई रणनीतिक प्रतिस्पर्धा बन चुकी है। यही वजह है कि एनवीडिया और टेस्ला जैसी कंपनियों के प्रमुख भी इस यात्रा का हिस्सा बने हैं।
ईरान और वैश्विक तनाव पर भी होगी चर्चा
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव तथा मध्य पूर्व की स्थिति भी बैठक का बड़ा एजेंडा है। हालिया संघर्षों के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है। चीन ईरानी तेल का बड़ा खरीदार है और ऐसे में वॉशिंगटन चाहता है कि बीजिंग ईरान पर दबाव बनाने में भूमिका निभाए। हालांकि ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका को ईरान मामले में चीन की मदद की आवश्यकता नहीं है, लेकिन अमेरिकी प्रशासन के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि चीन की भूमिका इस संकट में महत्वपूर्ण हो सकती है।
ताइवान विवाद पर भी दुनिया की नजर
ताइवान का मुद्दा अमेरिका-चीन संबंधों में सबसे संवेदनशील माना जाता है। अमेरिका ने हाल ही में ताइवान को हथियार बिक्री को मंजूरी दी थी, जिस पर चीन ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वह इस मुद्दे पर सीधे शी जिनपिंग से चर्चा करेंगे।
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