
दमोह/आकिब खान की रिपोर्ट: दमोह जिले में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें फर्जी MBBS डिग्री और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर सरकारी संजीवनी क्लिनिक में नौकरी कर रहे तीन कथित डॉक्टरों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। इस कार्रवाई के बाद पूरे स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है।
मामला तब सामने आया जब मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) की ओर से संदिग्ध नियुक्तियों और दस्तावेजों की जांच को लेकर पुलिस को शिकायत और प्रतिवेदन भेजा गया। इसके बाद दमोह पुलिस ने कोतवाली स्तर पर जांच शुरू की। जांच के दौरान कई दस्तावेजों में गंभीर अनियमितताएं और फर्जीवाड़े के संकेत मिले, जिसके बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए तीन लोगों को हिरासत में ले लिया।
मिली जानकारी के अनुसार ये आरोपी लंबे समय से सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों और संजीवनी क्लिनिक में कार्यरत थे और मरीजों का इलाज कर रहे थे। आरोप है कि इन्होंने कूटरचित दस्तावेज तैयार कर स्वयं को MBBS डॉक्टर के रूप में नियुक्त कराया और सरकारी सिस्टम में प्रवेश पा लिया। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान दस्तावेज सत्यापन में लापरवाही बरती गई या फिर जानबूझकर अनदेखी की गई।
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पुलिस ने जिन आरोपियों को हिरासत में लिया है उनमें कुमार सचिन यादव निवासी ग्वालियर, राजपाल गौर निवासी सीहोर और अजय मौर्य निवासी मुरैना शामिल हैं, जो वर्तमान में जबलपुर में पदस्थ बताया जा रहा है। इनमें से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि एक आरोपी को अभिरक्षा में लेकर पूछताछ की जा रही है।
इस पूरे मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया है, जिनमें 318(3), 338, 336(3) और 340(2) शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि यह मामला केवल तीन व्यक्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क होने की संभावना है।
आनंद कालादगी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि फर्जी MBBS डिग्री तैयार करने, रजिस्ट्रेशन कराने और नियुक्ति दिलाने में कुछ अन्य लोगों और संस्थानों की भूमिका भी हो सकती है। इसी आधार पर एक विशेष जांच टीम का गठन किया गया है, जो पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है।
मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की नियुक्ति प्रक्रिया और सत्यापन प्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर जांच और सत्यापन सही तरीके से किया गया होता तो इतने लंबे समय तक फर्जी डॉक्टर मरीजों का इलाज नहीं कर पाते। फिलहाल पुलिस जांच जारी है और अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी गिरफ्तारी हो सकती है तथा पूरे फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा संभव है।
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