
“कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती”—इस प्रेरणादायी पंक्ति को जीवन में उतारते हुए सात रिटायर्ड आईएएस अधिकारियों ने शिक्षा के क्षेत्र में एक नई पहल की है। सेवानिवृत्ति के बाद भी समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने की सोच के साथ उन्होंने एक स्कूल की स्थापना की है। उनका मानना है कि शिक्षा ही वह साधन है जो आने वाली पीढ़ियों को सशक्त बना सकती है और देश को नई दिशा दे सकती है।
इन अधिकारियों ने अपने अनुभव और प्रशासनिक कौशल का उपयोग करते हुए स्कूल की नींव रखी। शुरुआत में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा—जगह की कमी, संसाधनों की व्यवस्था और लोगों का विश्वास जीतना। लेकिन दृढ़ संकल्प और टीमवर्क के बल पर उन्होंने इन कठिनाइयों को पार किया। आज यह स्कूल बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के साथ-साथ उन्हें नैतिक मूल्यों से भी जोड़ रहा है।
इस पहल का उद्देश्य केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों को आत्मनिर्भर और जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है। स्कूल में आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है ताकि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के बच्चे समान अवसर पा सकें। साथ ही, खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
सातों अधिकारियों का कहना है कि यह स्कूल उनके जीवन का दूसरा innings है। उन्होंने प्रशासनिक सेवा में देश की सेवा की और अब शिक्षा के माध्यम से समाज को नई ऊर्जा देने का संकल्प लिया है। उनकी यह पहल न केवल मध्य प्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है।
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