
शामली: उत्तर प्रदेश के शामली जनपद में एक निजी अस्पताल पर गंभीर चिकित्सीय लापरवाही का आरोप लगा है। डिलीवरी के लिए भर्ती एक गर्भवती महिला की ऑपरेशन के बाद मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर ने महिला के पेट में कपड़ा छोड़ दिया, जिसके कारण उसके शरीर में संक्रमण फैल गया और उपचार के दौरान उसकी जान चली गई। मामले को लेकर परिजनों ने आरोपी डॉक्टर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया।
जानकारी के अनुसार थानाभवन क्षेत्र के गांव उस्मानपुर निवासी छत्रपाल ने 20 मई को अपनी पत्नी रितिका को प्रसव के लिए शामली शहर के दिल्ली रोड स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। रात के समय डॉक्टर ने सामान्य प्रसव की जगह ऑपरेशन से डिलीवरी करने की सलाह दी, जिसके बाद महिला का ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के बाद महिला ने एक स्वस्थ नवजात शिशु को जन्म दिया, लेकिन उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई।
परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद महिला को लगातार अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा था और उसकी हालत गंभीर बनी हुई थी। स्थिति बिगड़ने पर अस्पताल प्रबंधन ने महिला को मेरठ के एक अस्पताल में भर्ती कराया। वहां भी कई दिनों तक इलाज चला, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। इसके बाद परिजन उसे मेरठ के ही दूसरे अस्पताल ले गए, जहां जांच के दौरान डॉक्टरों ने महिला के पेट में गंभीर संक्रमण और अंदर कपड़ा छोड़े जाने की बात बताई।
बताया जा रहा है कि मेरठ के अस्पताल में महिला का दोबारा ऑपरेशन किया गया, जिसमें उसके पेट से कपड़ा निकाला गया। इस प्रक्रिया का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल होने का दावा किया जा रहा है। चिकित्सकों के अनुसार पेट में कपड़ा रह जाने के कारण शरीर में सेप्टिक संक्रमण फैल गया था, जिससे महिला की हालत लगातार बिगड़ती गई और अंततः उसकी मौत हो गई।
महिला की मौत के बाद आक्रोशित परिजन शव लेकर शामली शहर कोतवाली पहुंच गए और आरोपी डॉक्टर तथा अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग को लेकर हंगामा किया। पुलिस ने स्थिति को संभालते हुए शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया, लेकिन परिवार ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक आरोपी डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं होगी, तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। मृतका की मौत से परिवार में मातम पसरा हुआ है। उसके छोटे-छोटे बच्चों और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं नवजात शिशु स्वस्थ बताया जा रहा है।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा अन्य चिकित्सकीय दस्तावेजों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उधर, स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित अस्पताल में पहले भी लापरवाही के आरोप लगते रहे हैं। अब इस मामले ने एक बार फिर निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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