
यह समीक्षा बैठक उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति-2021 के तहत की गई, जिसमें मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि नई नीति को निवेशकों की जरूरतों के अनुसार और अधिक आकर्षक, व्यावहारिक और समयानुकूल बनाया जाए। उन्होंने कहा कि नई नीति में AI आधारित डेटा सेंटर, ग्रीन डेटा सेंटर, तेज़ मंजूरी प्रणाली, मजबूत बिजली आपूर्ति और बेहतर कनेक्टिविटी जैसी सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में ऐसे डेटा सेंटर विकसित किए जाएं जो न केवल पारंपरिक सर्वर क्षमता बढ़ाएं बल्कि उच्च स्तरीय AI कंप्यूटिंग क्षमता भी प्रदान करें। इसके लिए विशेष प्रोत्साहन नीति तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि कंपनियां एडवांस टेक्नोलॉजी वाले डेटा सेंटर पार्क स्थापित करें। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति-2021 के तहत पहले 900 मेगावाट क्षमता और लगभग 30 हजार करोड़ रुपये निवेश का लक्ष्य रखा गया था। अब तक राज्य में 21,342.90 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव स्वीकृत हो चुके हैं और कई कंपनियों को लेटर ऑफ कंफर्ट जारी किया गया है। वर्तमान में प्रदेश में 6 डेटा सेंटर पार्क और 2 इकाइयां कार्यरत हैं, जबकि 644 मेगावाट क्षमता पर काम जारी है।
सरकार के अनुसार वर्ष 2026 तक भारत की कुल डेटा सेंटर क्षमता में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 8 से 9 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है। यह राज्य के लिए डिजिटल निवेश के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। बैठक में यह भी बताया गया कि कई बड़ी कंपनियां पहले से ही उत्तर प्रदेश में निवेश कर रही हैं। इनमें हीरानंदानी ग्रुप, एनटीटी ग्लोबल डेटा सेंटर्स, अडानी ग्रुप, एसटी टेलीमीडिया, एसकेवीआर सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस, वेब वर्क्स और सिफी जैसी कंपनियां शामिल हैं, जो विभिन्न परियोजनाओं पर काम कर रही हैं।
इसके अलावा, भविष्य के लिए बड़ी निवेश संभावनाएं भी सामने आई हैं। लगभग 5,410 मेगावाट क्षमता के डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स में करीब 4.90 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इनमें एएम ग्रीन, ट्राइफैक्टा कॉनेक्स, एस्सार, ग्रू एनर्जी, गोल्डन स्टेट कैपिटल, मैपलेट्री, सीटीआरएल-एस और एनएक्स्ट्रा जैसी कंपनियां शामिल हैं। ये परियोजनाएं नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र, लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज, मेरठ और सीतापुर जैसे शहरों में विकसित की जा सकती हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि डेटा सेंटर विकास को केवल नोएडा या एनसीआर तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसे पूरे राज्य में फैलाया जाए। इससे प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी डिजिटल निवेश, रोजगार और तकनीकी विकास के अवसर बढ़ेंगे। सरकार का मानना है कि इन योजनाओं के लागू होने से उत्तर प्रदेश देश का एक प्रमुख डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर हब बन सकता है, जिससे आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर निवेश और रोजगार सृजन संभव होगा।
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