
सागर: विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शासकीय कला एवं वाणिज्य अग्रणी महाविद्यालय सागर में आयोजित चार दिवसीय पर्यावरण व्याख्यान माला का सफलतापूर्वक समापन हो गया। पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता को समर्पित इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता के निर्देशन में किया गया, जबकि रसायन शास्त्र विभाग की सहायक प्राध्यापक एवं कार्यक्रम की सह-संयोजक डॉ. शुचिता अग्रवाल ने इसके संचालन और समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चार दिनों तक चले इस आयोजन में लगभग 65 छात्र-छात्राओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने का प्रयास किया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित डॉ. सुबोध जैन ने पर्यावरण प्रदूषण के बढ़ते खतरे पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण को सबसे अधिक नुकसान मानवीय गतिविधियों से पहुंच रहा है। उन्होंने बताया कि तेजी से बढ़ता औद्योगीकरण, वाहनों से निकलने वाला धुआं, वनों की अंधाधुंध कटाई, प्लास्टिक का अत्यधिक उपयोग और प्राकृतिक संसाधनों का अनियंत्रित दोहन पृथ्वी के पर्यावरणीय संतुलन को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव लाकर पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता ने अपने संबोधन में पर्यावरण और मानव जीवन के गहरे संबंध को रेखांकित करते हुए कहा कि स्वच्छ वायु, शुद्ध जल, पौष्टिक भोजन और संतुलित जलवायु जैसी जीवन की मूलभूत आवश्यकताएं प्रकृति की ही देन हैं। उन्होंने कहा कि पेड़-पौधे, नदियां, पर्वत और जीव-जंतु मिलकर पृथ्वी पर जीवन का संतुलन बनाए रखते हैं और यदि पर्यावरण प्रदूषित होता है तो इसका सीधा प्रभाव मानव स्वास्थ्य और भविष्य पर पड़ता है। उन्होंने विद्यार्थियों को अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने और जल संरक्षण को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. मयंक रूसिया ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने “पर्यावरण बचाओ, भविष्य बचाओ” का संदेश देते हुए कहा कि स्वच्छ पर्यावरण ही स्वस्थ जीवन की नींव है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे पौधारोपण को जनआंदोलन का रूप दें, जल संरक्षण को प्राथमिकता दें और सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग पूरी तरह बंद करने की दिशा में कार्य करें।
चार दिवसीय व्याख्यान माला के समापन अवसर पर सभी विद्यार्थियों और प्राध्यापकों ने सामूहिक रूप से पर्यावरण संरक्षण की शपथ ली। उन्होंने अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखने, प्लास्टिक के उपयोग से बचने तथा प्रत्येक वर्ष कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के अंत में आयोजन समिति और सहयोगी प्राध्यापकों के योगदान की सराहना की गई। यह आयोजन विद्यार्थियों में पर्यावरणीय चेतना विकसित करने और प्रकृति संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी का भाव जागृत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
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