
उज्जैन: विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर एक बार फिर सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो को लेकर चर्चाओं में आ गया है। इस बार विवाद का केंद्र एक युवक है, जो फिल्म ‘पुष्पा’ के किरदार से प्रेरित विशेष वेशभूषा में मंदिर परिसर में पहुंचा। हालांकि मामला उसकी वेशभूषा से अधिक मंदिर परिसर में वीडियोग्राफी और नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर तूल पकड़ रहा है। वीडियो सामने आने के बाद मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी तंत्र और वीआईपी प्रोटोकॉल को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
वायरल वीडियो में युवक साड़ी, ब्लाउज, पायल, चूड़ियां, नथ और अन्य श्रृंगार सामग्री के साथ मंदिर परिसर में दिखाई दे रहा है। वीडियो में वह मंदिर के विभिन्न हिस्सों में घूमता और कैमरे के सामने पोज देता नजर आ रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों के अनुसार युवक को विशेष व्यवस्था के तहत दर्शन भी कराए गए। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सबसे बड़ी चर्चा इस बात को लेकर है कि महाकाल मंदिर परिसर में फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पूरी तरह प्रतिबंधित होने के बावजूद यह वीडियो कैसे रिकॉर्ड किया गया। मंदिर प्रशासन लंबे समय से श्रद्धालुओं के लिए मोबाइल फोन के उपयोग और वीडियो रिकॉर्डिंग पर सख्ती बरतता रहा है। ऐसे में वीडियो का मंदिर परिसर के अंदर शूट होना और बाद में सोशल मीडिया पर वायरल होना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।
वायरल वीडियो में कुछ सुरक्षाकर्मी और मंदिर कर्मचारी भी युवक के साथ तस्वीरें खिंचवाते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसी वजह से यह मामला और अधिक चर्चा का विषय बन गया है। लोगों का सवाल है कि यदि नियम सभी श्रद्धालुओं के लिए समान हैं, तो इस मामले में कथित तौर पर विशेष छूट कैसे दी गई और सुरक्षा कर्मियों ने इस पर आपत्ति क्यों नहीं जताई। मामला सामने आने के बाद महाकाल मंदिर प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया है। महाकाल मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि वायरल वीडियो पुराना है, लेकिन इसके संज्ञान में आते ही संबंधित सुपरवाइजर के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे पद से हटा दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिर की गरिमा, सुरक्षा और नियमों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
इस घटना के बाद एक बार फिर महाकाल मंदिर में सुरक्षा प्रोटोकॉल, प्रतिबंधित क्षेत्रों में मोबाइल उपयोग और नियमों के समान अनुपालन को लेकर बहस तेज हो गई है। श्रद्धालु और आमजन प्रशासन से यह अपेक्षा कर रहे हैं कि मंदिर की मर्यादा बनाए रखने के लिए नियमों का पालन सभी पर समान रूप से सुनिश्चित किया जाए।
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