
राम मंदिर से जुड़े कथित चोरी के मामले को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। इस मुद्दे पर विरोध दर्ज कराने अयोध्या पहुंचे उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को पुलिस ने नजरबंद कर दिया। कांग्रेस का आरोप है कि उन्हें राम मंदिर ट्रस्ट कार्यालय के प्रस्तावित घेराव से रोकने के लिए प्रशासन ने यह कार्रवाई की, जबकि पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती कदम उठाए गए हैं।
कांग्रेस नेताओं के अनुसार, पार्टी पहले ही घोषणा कर चुकी थी कि राम मंदिर से जुड़े कथित चोरी के मामले की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर ट्रस्ट कार्यालय का शांतिपूर्ण घेराव किया जाएगा। इसी कार्यक्रम के तहत प्रदेश अध्यक्ष अयोध्या पहुंचे थे। हालांकि, पुलिस ने उन्हें निर्धारित कार्यक्रम से पहले ही रोक लिया और नजरबंद कर दिया। इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रशासन की कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए विरोध प्रदर्शन किया।
इस बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की पत्नी ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि उनके पति की सुरक्षा को खतरा है और उन्हें सरकार से जान का डर है। उनका आरोप है कि राजनीतिक आवाज दबाने के लिए प्रशासनिक शक्ति का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो कांग्रेस इस मुद्दे को राज्यव्यापी आंदोलन का रूप दे सकती है।
राम मंदिर से जुड़े कथित चोरी के मामले ने पहले ही राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। विपक्ष लगातार मामले की पारदर्शी जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है। वहीं, सत्तापक्ष का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और मामले की जांच संबंधित एजेंसियों द्वारा की जा रही है। सरकार ने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश बताया है।
अयोध्या में सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात किया। राम मंदिर परिसर और ट्रस्ट कार्यालय के आसपास निगरानी बढ़ा दी गई ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। प्रशासन का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को कानून-व्यवस्था भंग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी, जबकि शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का सम्मान किया जाएगा।
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