
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर ठगी का तरीका भी तेजी से बदल रहा है। अब संगठित साइबर अपराधी AI की मदद से करीब 100 भाषाओं में लोगों से बातचीत कर उन्हें ठगी का शिकार बना रहे हैं। अत्याधुनिक तकनीक के कारण फर्जी कॉल, चैट और संदेश इतने वास्तविक लगते हैं कि आम लोगों के लिए असली और नकली में अंतर करना मुश्किल हो जाता है।
रिपोर्टों के अनुसार, दक्षिण-पूर्व एशिया, विशेष रूप से म्यांमार में संचालित कई कथित स्कैम सेंटरों में लोगों को जबरन साइबर ठगी कराने के लिए बंधक बनाकर रखा जाता है। इन केंद्रों में काम करने वालों को रोजाना बड़ी रकम की ठगी का लक्ष्य दिया जाता है। दावा है कि लक्ष्य पूरा नहीं होने पर उन्हें शारीरिक यातनाएं दी जाती हैं, जिनमें बिजली का करंट देना, मारपीट और अन्य गंभीर प्रताड़ना शामिल है। कुछ मामलों में महिलाओं के साथ यौन हिंसा और दुष्कर्म जैसे गंभीर आरोप भी सामने आए हैं।
AI आधारित टूल्स की मदद से ठग अब अलग-अलग देशों के लोगों की भाषा, बोलचाल और स्थानीय शैली के अनुरूप संदेश तैयार कर रहे हैं। इसके अलावा डीपफेक ऑडियो, नकली वीडियो, फर्जी दस्तावेज और वास्तविक दिखने वाली वेबसाइटों का इस्तेमाल कर लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश की जाती है। इससे बैंकिंग फ्रॉड, निवेश घोटाले, नौकरी के नाम पर ठगी और ऑनलाइन रोमांस स्कैम जैसे मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अनजान कॉल, लिंक, निवेश प्रस्ताव या डिजिटल भुगतान से पहले उसकी अच्छी तरह जांच करना जरूरी है। किसी भी संदिग्ध संदेश पर तुरंत प्रतिक्रिया देने से बचें और ओटीपी, बैंकिंग पासवर्ड या व्यक्तिगत जानकारी किसी के साथ साझा न करें। यदि किसी प्रकार की ऑनलाइन ठगी का संदेह हो तो तुरंत स्थानीय पुलिस या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि AI जहां कई क्षेत्रों में नई संभावनाएं लेकर आया है, वहीं इसका दुरुपयोग रोकना भी बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। सरकारों, टेक कंपनियों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय तथा मजबूत साइबर सुरक्षा उपायों के जरिए ही ऐसे अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई संभव हो सकेगी।
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