
देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर से एक अत्यंत गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आ रहा है, जहाँ शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे युवाओं ने प्रशासन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रदर्शनकारी युवाओं का कहना है कि आंदोलन स्थल पर उनके खाने-पीने की मूलभूत सुविधाओं पर रोक लगाई जा रही है।
मिली जानकारी के अनुसार, जंतर-मंतर पर अनशन और प्रदर्शन पर बैठे युवाओं तक खाद्य सामग्री और पानी पहुँचाने वाले ऑनलाइन डिलीवरी पार्टनर्स (जैसे स्विगी और ज़ोमैटो) को आंदोलन स्थल के भीतर प्रवेश करने से रोका जा रहा है। इस पाबंदी के कारण अनशन स्थल पर मौजूद युवाओं को भोजन और पीने के पानी के लिए भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।
प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध दर्ज कराना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। परंतु, भोजन और पानी जैसी जीवन के लिए अनिवार्य प्राथमिक आवश्यकताओं पर रोक लगाना अमानवीयता की पराकाष्ठा है।
आंदोलनकारियों ने सवाल उठाया है कि क्या तंत्र में बैठे अधिकारियों और सरकार में शामिल जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों के पास मानवीय संवेदनाएँ समाप्त हो चुकी हैं? युवाओं का तर्क है कि इस तरह के कड़े और कठोर प्रतिबंधों के जरिए उनके हौसले और आंदोलन को तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जो कि अत्यंत निंदनीय है।
जंतर-मंतर पर मौजूद युवाओं ने प्रशासन से अपील की है कि भोजन और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं को बाधित न किया जाए तथा इस अमानवीय रुख को तुरंत समाप्त किया जाए। अब देखना यह होगा कि इस स्थिति पर प्रशासन क्या सफाई देता है और क्या प्रदर्शनकारियों को बुनियादी राहत पहुँचाई जाती है।
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