
उमरिया/राकेश दर्दवंशी की रिपोर्ट: बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में शनिवार को एक महत्वपूर्ण अभियान सफलतापूर्वक पूरा किया गया। धमोखर बफर के बरबसपुर बीट में खराब रेडियो कॉलर पहने एक मादा बाघिन को सुरक्षित तरीके से ट्रेंकुलाइज (बेहोश) कर उसका निष्क्रिय हो चुका रेडियो कॉलर हटाया गया। स्वास्थ्य परीक्षण के बाद बाघिन को पूरी तरह होश में लाकर उसके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित छोड़ दिया गया।
वन विभाग के अनुसार बाघिन का रेडियो कॉलर कई दिनों से काम नहीं कर रहा था, जिससे उसकी लोकेशन मिलना बंद हो गई थी। इसके बाद प्रशिक्षित हाथियों, वन अमले, वन्यजीव विशेषज्ञों, ट्रैप कैमरों, वीएचएफ उपकरणों और अन्य आधुनिक तकनीकी संसाधनों की मदद से करीब 100 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में व्यापक खोज अभियान चलाया गया।
लगातार बारिश जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद टीम ने 25 जुलाई को बाघिन को उसके होम रेंज में पूरी तरह स्वस्थ अवस्था में खोज निकाला। इसके बाद प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) से अनुमति प्राप्त कर रेडियो कॉलर हटाने की कार्ययोजना तैयार की गई। दो दिनों की गहन खोज के बाद शनिवार को पीएफ-126, बरबसपुर-झांझहार क्षेत्र में अभियान सफलतापूर्वक पूरा किया गया। इस अभियान में क्षेत्र संचालक, उप संचालक, सहायक संचालक धमोखर बफर, वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी, वन परिक्षेत्र अधिकारी सहित 63 अधिकारी-कर्मचारियों ने भाग लिया। वहीं प्रशिक्षित हाथी लक्ष्मण, सूर्या, रामा और श्याम तथा उनके महावतों की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण रही।
स्वास्थ्य परीक्षण में बाघिन पूरी तरह स्वस्थ पाई गई। रेडियो कॉलर हटाने के बाद उसे पूरी तरह होश में लाकर जंगल में छोड़ दिया गया, जहां वह सामान्य रूप से अपने प्राकृतिक आवास की ओर चली गई। क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय ने बताया कि बांधवगढ़ में वन्यजीव संरक्षण के लिए आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि खराब रेडियो कॉलर के कारण बाघिन की निगरानी प्रभावित हो रही थी, इसलिए सभी आवश्यक अनुमतियों और निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन करते हुए अभियान संचालित किया गया। पूरी प्रक्रिया के दौरान बाघिन की सुरक्षा और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखा गया तथा सफलतापूर्वक कॉलर हटाकर उसे सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया गया।
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