
फलटन/महाराष्ट्र: (मुकेश कुमार जैन की रिपोर्ट):जैन समाज के लिए वर्ष 2026 आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व लेकर आया है। क्रांतिकारी राष्ट्रसंत परम पूज्य आचार्य श्री 108 गुप्तिनंदीजी गुरुदेव का 36वां चातुर्मास इस वर्ष महाराष्ट्र की ऐतिहासिक नगरी फलटन में आयोजित होने जा रहा है। 23 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद आचार्य श्री का पुनः फलटन नगरी में चातुर्मास होना समाजजनों के लिए एक विशेष धार्मिक संयोग माना जा रहा है।
आचार्य श्री के मंगल सान्निध्य में होने वाले इस चातुर्मास को लेकर फलटन सहित आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धा और उत्साह का वातावरण बना हुआ है। जैन समाज के लोग आयोजन की तैयारियों में जुटे हुए हैं। नगर में धार्मिक सजावट, श्रद्धालुओं के ठहरने, भोजन और अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
धर्मसभा, प्रवचन और आध्यात्मिक कार्यक्रमों का होगा आयोजन
चातुर्मास काल के दौरान आचार्य श्री के सान्निध्य में प्रतिदिन धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें धर्मसभा, मंगल प्रवचन, स्वाध्याय, पूजन-अर्चन, तप, आराधना और संस्कार शिविर प्रमुख रहेंगे। श्रद्धालुओं का मानना है कि संतों का चातुर्मास किसी क्षेत्र के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा और धार्मिक चेतना का अवसर होता है। इस दौरान समाज के लोगों को आत्मचिंतन, संयम और धर्म मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है।
1 अगस्त को होगा चातुर्मास कलश स्थापना महोत्सव
आयोजन समिति के अनुसार, 1 अगस्त 2026 को फलटन में चातुर्मास कलश स्थापना महोत्सव भव्य धार्मिक वातावरण में आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। समिति द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। बाहर से आने वाले भक्तों के लिए आवास, भोजन और कार्यक्रम स्थल पर आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है।
54वें अवतरण दिवस और गुरु पूर्णिमा का मिलेगा विशेष अवसर
इस वर्ष का चातुर्मास कई विशेष धार्मिक अवसरों का साक्षी बनेगा। चातुर्मास के दौरान आचार्य श्री गुप्तिनंदीजी गुरुदेव का 54वां अवतरण दिवस श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। इसके साथ ही गुरु पूर्णिमा पर्व भी गुरुदेव के मंगल सान्निध्य में मनाने का अवसर श्रद्धालुओं को मिलेगा। इस दौरान विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों, रक्षा सूत्र प्रदान करने और अन्य आध्यात्मिक आयोजनों में समाजजन शामिल होंगे।
फलटन में बन रहा आध्यात्मिक माहौल
आचार्य श्री के आगमन को लेकर फलटन नगरी में धार्मिक उत्साह देखने को मिल रहा है। जैन समाज के लोग इस ऐतिहासिक अवसर को लेकर काफी उत्साहित हैं। उनका कहना है कि 23 वर्षों बाद आचार्य श्री का चातुर्मास क्षेत्र के लिए सौभाग्य का विषय है। आयोजन समिति ने देशभर के जैन समाज और धर्मप्रेमियों से अपील की है कि वे 1 अगस्त को फलटन पहुंचकर इस पुण्य अवसर में सहभागी बनें और आचार्य श्री के मंगल आशीर्वाद का लाभ प्राप्त करें। यह चातुर्मास धर्म, संयम, साधना और आत्मकल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
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