
सागर: इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की सागर शाखा द्वारा नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) के प्रभावी प्रबंधन और जटिल नवजात रोगों के उपचार को लेकर उच्चस्तरीय वैज्ञानिक सेमिनार आयोजित किया गया। शैक्षणिक आयोजन में सागर और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में चिकित्सकों ने सहभागिता की। विशेषज्ञों ने नवजात शिशुओं की गंभीर स्वास्थ्य स्थितियों, संक्रमण नियंत्रण और उपचार की आधुनिक तकनीकों पर अनुभव साझा किए।
समयपूर्व जन्मे शिशुओं में फंगल संक्रमण पर चर्चा
सेमिनार के प्रथम वैज्ञानिक सत्र में विशेषज्ञ डॉ. कुलदीप सुखदेवे ने NICU में भर्ती समयपूर्व जन्मे, कम वजन वाले और गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं में फंगल संक्रमण के बढ़ते खतरे पर चर्चा की। उन्होंने संक्रमण के लक्षणों की समय पर पहचान, NICU में संक्रमण नियंत्रण के कड़े मानकों के पालन और एंटीफंगल दवाओं के साक्ष्य-आधारित एवं विवेकपूर्ण उपयोग को नवजात उपचार के लिए महत्वपूर्ण बताया।
जन्मजात हाइड्रोनेफ्रोसिस के निदान और उपचार पर जानकारी
दूसरे वैज्ञानिक सत्र में डॉ. दीपक गोयल ने जन्मजात हाइड्रोनेफ्रोसिस के निदान और प्रबंधन पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि कई मामलों में नियमित अल्ट्रासाउंड और चिकित्सकीय निगरानी के माध्यम से स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि मूत्र मार्ग में रुकावट, बार-बार संक्रमण या गुर्दे की कार्यक्षमता प्रभावित होने जैसी स्थिति सामने आती है, तब शल्य चिकित्सा की आवश्यकता पड़ सकती है।
गंभीर नवजात मामलों के व्यावहारिक प्रबंधन पर अनुभव साझा
तीसरे सत्र में डॉ. स्वप्निल भिसीकर ने NICU में आने वाले अत्यंत गंभीर मामलों के प्रबंधन से जुड़े अपने व्यावहारिक अनुभव साझा किए। उन्होंने गंभीर रूप से बीमार नवजातों के उपचार में त्वरित एवं सटीक निदान, निरंतर निगरानी, श्वसन सहायता, संतुलित पोषण, संक्रमण नियंत्रण और बहुविषयक चिकित्सकीय टीम के समन्वय को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने विभिन्न केस स्टडी के माध्यम से चिकित्सकों को गंभीर नवजात मामलों के उपचार की व्यावहारिक रणनीतियों से अवगत कराया।
वैज्ञानिक आयोजनों से चिकित्सकीय दक्षता में होती है वृद्धि
आईएमए सागर के अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि अनुभव-आधारित और वैज्ञानिक आयोजनों से चिकित्सकों के नैदानिक कौशल, व्यावसायिक ज्ञान तथा जटिल परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता को मजबूती मिलती है। सेमिनार के दौरान चिकित्सकों ने विशेषज्ञों के साथ केस आधारित चर्चाओं में सक्रिय सहभागिता की और नवजात चिकित्सा से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. स्वाति पटेल ने किया।
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