
पिछोर/ रानू परिहार: शिवपुरी जिले की पिछोर विधानसभा में पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता केपी सिंह ‘कक्काजू’ के लंबे राजनीतिक कार्यकाल को लेकर विकास कार्यों की चर्चा एक बार फिर सामने आई है। उनके समर्थकों का दावा है कि 1993 से 2018 के बीच पिछोर में सड़क, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर बड़े स्तर पर काम हुआ। इसी आधार पर क्षेत्र में उनके विकास मॉडल को लेकर राजनीतिक चर्चा होती रही है।
छह बार विधायक बनने के पीछे विकास का दावा
केपी सिंह वर्ष 1993 में पहली बार पिछोर से विधायक निर्वाचित हुए और 2018 तक लगातार छह बार विधानसभा चुनाव जीते। समर्थक इसे क्षेत्र की जनता के लंबे समय तक मिले समर्थन से जोड़ते हैं। उनका कहना है कि पिछोर में चुनावी राजनीति के साथ साथ सड़क, बिजली, सिंचाई और शिक्षा जैसे स्थानीय मुद्दे भी हमेशा प्रमुख रहे हैं।
पगडंडियों से पक्की सड़कों तक पहुंचने का दावा
पिछोर क्षेत्र में सड़क संपर्क को विकास की प्रमुख कड़ी बताया जाता है। समर्थकों के अनुसार उनके कार्यकाल के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण और मुख्य मार्गों के सुधार पर विशेष जोर दिया गया।
पिछोर-खनियांधाना, पिछोर-करैरा, पिछोर-भोंती और पिछोर-दतिया जैसे मार्गों के विकास को क्षेत्र की बेहतर कनेक्टिविटी से जोड़कर देखा जाता है। दावा है कि ग्रामीण सड़कों के विस्तार से गांवों को मुख्य मार्गों से जोड़ने के साथ किसानों को अपनी उपज मंडियों तक पहुंचाने में भी सुविधा मिली।
सिंचाई परियोजनाओं से खेती को मिला सहारा
कृषि प्रधान पिछोर क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार को भी विकास की अहम उपलब्धि के रूप में बताया जाता है। लखूंदर बांध, बरखेड़ा तालाब के जीर्णोद्धार, महुआ और गोपालपुरा सिंचाई परियोजनाओं के साथ विभिन्न स्टॉप डैम, चेक डैम और तालाबों के निर्माण का उल्लेख किया गया है।
समर्थकों का कहना है कि सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से किसानों को खरीफ के साथ रबी की फसल लेने में भी मदद मिली और खेती का दायरा बढ़ा।
शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर जोर
पिछोर में उच्च शिक्षा के लिए शासकीय महाविद्यालय की स्थापना और युवाओं के तकनीकी प्रशिक्षण के लिए आईटीआई जैसी संस्थाओं को क्षेत्र के विकास से जोड़ा जाता है। स्कूल भवनों के निर्माण और कन्या शिक्षा से जुड़ी सुविधाओं के विस्तार का भी उल्लेख किया गया है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में पिछोर के अस्पताल के विस्तार के साथ खनियांधाना में सिविल अस्पताल और ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना को महत्वपूर्ण कदम बताया गया है।
कोरोना संक्रमण के दौरान विधायक निधि से जिला अस्पताल को आर्थिक सहायता दिए जाने का भी उल्लेख किया गया है।
बिजली और पेयजल को लेकर भी किए गए प्रयास
ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था मजबूत करने के लिए 33/11 केवी सब-स्टेशनों और विद्युत ग्रिड की स्थापना तथा ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाने का दावा किया गया है। समर्थकों के अनुसार इन प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की स्थिति में सुधार आया।
पेयजल के लिए हैंडपंप और नल जल योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण इलाकों में पानी की उपलब्धता बढ़ाने की कोशिशों का भी उल्लेख किया गया है।
पिछोर को जिला बनाने की मांग
पिछोर को जिला बनाने की मांग भी केपी सिंह के राजनीतिक एजेंडे का प्रमुख हिस्सा रही है। समर्थकों के मुताबिक उन्होंने करीब डेढ़ दशक पहले विधानसभा स्तर पर इस मांग को प्रमुखता से उठाया था। उनका तर्क रहा कि भौगोलिक क्षेत्रफल और आबादी को देखते हुए पिछोर को जिला बनाने से प्रशासनिक सुविधाएं लोगों के करीब पहुंच सकेंगी।
विकास मॉडल को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने का दावा
केपी सिंह के समर्थक उनके विकास मॉडल को केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं मानते। उनका कहना है कि गरीबों को भूमि पट्टे, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की नियुक्ति तथा शिक्षकों की भर्ती जैसे कामों से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और सामाजिक सुविधाओं का विस्तार हुआ।
पिछोर की राजनीति में केपी सिंह का लंबा कार्यकाल आज भी चर्चा का विषय है। उनके समर्थक इसे क्षेत्र में सड़क, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से जोड़ते हैं। वहीं, इन विकास कार्यों और उनसे जुड़े आंकड़ों का आधिकारिक विभागीय रिकॉर्ड के आधार पर अलग से सत्यापन किया जाना आवश्यक है।
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