तमक में तबाही की असली वजह सिर्फ बारिश नहीं, पहाड़ की कमजोर संरचना ने भी बढ़ाया संकट

उत्तराखंड के तमक क्षेत्र में आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। शुरुआती तौर पर इसे तेज बारिश से जोड़कर देखा गया, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार पहाड़ी क्षेत्र की भूगर्भीय परिस्थितियों ने भी आपदा को भयानक बनाने में बड़ी भूमिका निभाई। हिमालय का कमजोर भू भाग भारी बारिश के दौरान भूस्खलन और अचानक तेज बहाव के खतरे को बढ़ा देता है।

सिर्फ बारिश को जिम्मेदार मानना पूरी तस्वीर नहीं

तमक में हुई तबाही को समझने के लिए केवल बारिश की मात्रा देखना पर्याप्त नहीं है। पहाड़ों में ढलानों की संरचना, चट्टानों की स्थिति, मिट्टी की पकड़ और जल निकासी जैसे भूगर्भीय पहलू भी बाढ़ के असर को प्रभावित करते हैं।

तेज बारिश के दौरान जब जमीन पहले से पानी से संतृप्त हो जाती है, तो कमजोर ढलानों पर मलबा और चट्टानें खिसकने लगती हैं। यही मलबा नालों और जलधाराओं के प्रवाह को प्रभावित कर अचानक बाढ़ की स्थिति को और गंभीर बना सकता है।

हिमालय का नाजुक भू भाग बढ़ाता है खतरा

उत्तराखंड का हिमालयी क्षेत्र भौगोलिक रूप से बेहद संवेदनशील है। यहां संकरी घाटियां और तीखी ढलानें बारिश के पानी को तेजी से नीचे की ओर पहुंचाती हैं। ऐसे में सामान्य से अधिक बारिश होने पर पानी का बहाव कुछ ही समय में बेहद खतरनाक रूप ले सकता है।

बीते वर्षों की आपदाओं में भी यह सामने आया है कि भारी बारिश के साथ भूस्खलन और मलबे का बहाव नुकसान को कई गुना बढ़ा सकता है।

बारिश के साथ मलबे ने बढ़ाई विनाशकारी क्षमता

फ्लैश फ्लड के दौरान केवल पानी ही नहीं बहता, बल्कि अपने साथ मिट्टी, पत्थर, पेड़ों और अन्य मलबे को भी नीचे लाता है। इससे नदी-नालों का रास्ता बदल सकता है और पुल, सड़क तथा मकानों जैसी संरचनाओं पर अचानक बेहद ज्यादा दबाव पड़ सकता है।

उत्तराखंड में पहले भी ऐसी घटनाओं में बारिश, भूस्खलन और मलबे के संयुक्त प्रभाव से व्यापक नुकसान दर्ज किया गया है।

आपदा से सबक लेने की जरूरत

तमक की घटना एक बार फिर बताती है कि हिमालयी क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन केवल मौसम की निगरानी तक सीमित नहीं रह सकता। बारिश के साथ भूगर्भीय संवेदनशीलता, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और प्राकृतिक जलधाराओं की स्थिति पर भी लगातार नजर रखना जरूरी है।

विशेषज्ञों के मुताबिक पहाड़ी इलाकों में विकास कार्यों और निर्माण की योजना बनाते समय स्थानीय भूगर्भीय परिस्थितियों को प्राथमिकता देना भी जरूरी है, ताकि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान जान माल के नुकसान को कम किया जा सके।

यह भी पढ़े: बंगाल में एक और ISI संदिग्ध गिरफ्तार: फर्जी पहचान पत्र से रह रहा था पाकिस्तानी नागरिक

 

  • tamak-flood-geological-factors-beyond-rain-caused-devastation
Manisha Gupta

Manisha Gupta

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

भोपाल में 32 किमी लंबी तिरंगा यात्रा, सीएम मोहन यादव हुए शामिल

भोपाल में 32 किमी लंबी तिरंगा यात्रा, सीएम मोहन यादव हुए शामिल

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर शौर्य स्मारक पहुंचे सीएम मोहन यादव

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर शौर्य स्मारक पहुंचे सीएम मोहन यादव

मध्य प्रदेश में रोज 130 महिलाएं-बच्चियां लापता, हाई कोर्ट सख्त

मध्य प्रदेश में रोज 130 महिलाएं-बच्चियां लापता, हाई कोर्ट सख्त

देवी अहिल्याबाई होल्कर की पुण्यतिथि पर CM मोहन यादव की बड़ी घोषणा, पाल-गड़रिया समाज को मिलेगा बोर्ड

देवी अहिल्याबाई होल्कर की पुण्यतिथि पर CM मोहन यादव की बड़ी घोषणा, पाल-गड़रिया समाज को मिलेगा बोर्ड

Yuva Sansad 2026: यूथ पार्लियामेंट में CM मोहन यादव का विजन, युवा बनें रोजगारदाता

Yuva Sansad 2026: यूथ पार्लियामेंट में CM मोहन यादव का विजन, युवा बनें रोजगारदाता