
14 अगस्त 1947 की रात भारत के इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गई। देश आजादी की दहलीज पर खड़ा था और दिल्ली में संविधान सभा का विशेष सत्र शुरू होने वाला था। रात करीब 11 बजे संविधान सभा की कार्यवाही शुरू हुई। इसके कुछ ही देर बाद जवाहरलाल नेहरू का ऐतिहासिक ‘Tryst with Destiny’ भाषण दुनिया ने सुना, लेकिन उससे पहले सदन में देशभक्ति के सुर गूंजे थे। इन सुरों को आवाज दी थी सुचेता कृपलानी ने, जिन्होंने ‘वंदे मातरम्’ गाकर उस ऐतिहासिक रात को और यादगार बना दिया।
जवाहरलाल नेहरू के भाषण से पहले गाया गया ‘वंदे मातरम्’
आजादी की पूर्व संध्या पर संविधान सभा की कार्यवाही को खास तरीके से आयोजित किया गया था। जवाहरलाल नेहरू ने 4 अगस्त 1947 को राजेंद्र प्रसाद को लिखे पत्र में कार्यक्रम की रूपरेखा का उल्लेख किया था। इसमें संविधान सभा के एक सदस्य द्वारा ‘वंदे मातरम्’ के पहले अंतरे के गायन की योजना भी शामिल थी।
उस ऐतिहासिक अवसर पर यह जिम्मेदारी सुचेता कृपलानी ने निभाई। उन्होंने ‘वंदे मातरम्’ की प्रस्तुति दी और इसके बाद संविधान सभा की कार्यवाही आगे बढ़ी। फिर जवाहरलाल नेहरू ने अपना प्रसिद्ध ‘Tryst with Destiny’ भाषण दिया।
यानी जिस रात भारत ने गुलामी की लंबी रात के बाद आजादी की सुबह देखी, उस रात की शुरुआत ही देशभक्ति के गीत से हुई थी।
कौन थीं सुचेता कृपलानी?
सुचेता कृपलानी केवल उस ऐतिहासिक रात ‘वंदे मातरम्’ गाने वाली महिला नहीं थीं। वह स्वतंत्रता आंदोलन की सक्रिय कार्यकर्ता थीं और भारत के संविधान निर्माण की प्रक्रिया में भी उनकी भूमिका रही।
उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन में हिस्सा लिया और ब्रिटिश शासन के खिलाफ आंदोलन के दौरान गिरफ्तार भी हुईं। बाद में उन्होंने महात्मा गांधी के साथ भी काम किया और विभाजन के दौर में सांप्रदायिक हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में शांति प्रयासों में योगदान दिया।
आजादी के बाद सुचेता कृपलानी भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण नाम बनीं। वह आगे चलकर उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं और देश की पहली महिला मुख्यमंत्री के रूप में इतिहास में दर्ज हुईं।
11 बजे शुरू हुआ था संविधान सभा का विशेष सत्र
14 अगस्त की रात संविधान सभा का पांचवां सत्र रात करीब 11 बजे शुरू हुआ था। इसकी अध्यक्षता डॉ. राजेंद्र प्रसाद कर रहे थे। सभा में देश के स्वतंत्र होने के ऐतिहासिक क्षण की तैयारी थी।
कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम्’ के बाद सभा के अध्यक्ष का संबोधन, स्वतंत्रता संग्राम में शहीद हुए लोगों की स्मृति में मौन और फिर नेतृत्व का संबोधन शामिल था। इसके बाद नेहरू ने वह भाषण दिया, जिसे आज पूरी दुनिया ‘Tryst with Destiny’ के नाम से जानती है।
जब नेहरू ने कहा- भारत आजादी की ओर जागेगा
आधी रात के करीब नेहरू ने वह ऐतिहासिक भाषण दिया, जिसमें उन्होंने भारत के आजादी के क्षण को एक नए युग की शुरुआत के रूप में पेश किया। उनका संदेश सिर्फ सत्ता हस्तांतरण तक सीमित नहीं था। उन्होंने देश के सामने गरीबी, अज्ञानता, बीमारी और असमानता जैसी चुनौतियों को खत्म करने का लक्ष्य भी रखा।
नेहरू ने यह भी जोर दिया कि आजादी के साथ जिम्मेदारी आती है और भारत को अपने सभी नागरिकों के लिए न्याय और अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
‘वंदे मातरम्’ से शुरू हुई रात, आजादी के संकल्प पर पहुंची
14-15 अगस्त की वह रात इसलिए भी खास थी क्योंकि उसमें भारत के स्वतंत्रता संघर्ष की पूरी भावना दिखाई देती है। एक तरफ सुचेता कृपलानी की आवाज में ‘वंदे मातरम्’ था, जो स्वतंत्रता आंदोलन की भावनाओं से जुड़ा गीत था। दूसरी तरफ नेहरू का भाषण था, जिसमें स्वतंत्र भारत के भविष्य का सपना और जिम्मेदारियों का संकल्प सामने रखा गया।
आज जब हर साल 15 अगस्त को देश स्वतंत्रता दिवस मनाता है, तो लाल किले से होने वाले समारोह और तिरंगे के साथ उस ऐतिहासिक रात की याद भी जुड़ी होती है। लेकिन आजादी की उस पहली रात की कहानी सिर्फ नेहरू के भाषण तक सीमित नहीं थी। नेहरू के ऐतिहासिक संबोधन से पहले संविधान सभा में सुचेता कृपलानी की आवाज में गूंजा ‘वंदे मातरम्’ भी उस रात का उतना ही महत्वपूर्ण हिस्सा था।
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