
भोपाल: मध्य प्रदेश के वित्त विभाग में हुए लगभग 600 करोड़ रुपये के बड़े वित्तीय घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने बताया कि राज्य सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की आधुनिक तकनीक का उपयोग करके इस संदिग्ध लेन-देन और गड़बड़ी को पकड़ने में सफलता हासिल की है। मामला उजागर होने के बाद संबंधित आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करा दी गई है और गबन की गई राशि की वसूली की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से पकड़ा गया गबन
उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के अनुसार, यह घोटाला लंबे समय से फर्जी व संदिग्ध ट्रांजेक्शन के जरिए सरकारी खजाने को चूना लगाकर अंजाम दिया जा रहा था। वित्त विभाग ने अपने एआई-बेस्ड ऑडिट सिस्टम का इस्तेमाल कर डेटा का विश्लेषण किया, जिससे इस पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ। सरकार अब इस डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम को और अधिक मजबूत करने जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी धांधली को रोका जा सके।
विभिन्न विभागों तक फैलेगा जांच का दायरा
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि जांच आगे बढ़ने के साथ-साथ इसमें शामिल सभी संबंधित सरकारी विभागों के रिकॉर्ड खंगाले जाएंगे. जांच के दायरे में आने वाले विभाग: नगरीय प्रशासन, महिला एवं बाल विकास विभाग समेत अन्य सभी विभाग जिनकी भूमिका इस मामले में संदिग्ध पाई जाएगी, उनकी गहन जांच होगी। सख्त कानूनी कार्रवाई: गड़बड़ी में शामिल अधिकारियों, कर्मचारियों व अन्य दोषियों के खिलाफ पृथक-पृथक एफआईआर दर्ज की जाएगी। रिकवरी प्रक्रिया जारी: मामले में अब तक एक बड़ी राशि की रिकवरी की जा चुकी है, जिसे सरकारी खजाने में जमा कराया जा रहा है।
भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति
उपमुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार के मामलों में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि जांच निष्पक्ष रूप से चल रही है और इस फर्जीवाड़े में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो।
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