
बड़े जिले की कलेक्टरी संभाल रहे एक प्रमोटी आईएएस साहब इन दिनों अपनी ईमानदारी और सख्त कार्यशैली को लेकर स्टाफ के बीच खूब चर्चा में बताए जाते हैं। साहब के दावे अपनी जगह हैं, लेकिन पिछले दिनों हुई एक समीक्षा बैठक में सत्ताधारी दल के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री ने ऐसा मोर्चा खोला कि कलेक्टर साहब के चेहरे का रंग ही उड़ गया। बताया जाता है कि बैठक में नेता जी ने जिले की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए गरीबों से कथित वसूली का मुद्दा उठा दिया। उनका आरोप था कि जिले में गरीबों के साथ जमकर लूट चल रही है और बिना पैसा दिए अफसरों से काम करवाना मुश्किल हो गया है। इस मुद्दे को लेकर बैठक में माहौल उस समय और गंभीर हो गया, जब पूर्व मंत्री ने अधिकारियों की कार्यशैली पर खुलकर सवाल उठाने शुरू कर दिए।
नेता जी यहीं नहीं रुके। पूरी बैठक में अफसरों की कार्यशैली पर सवालों की ऐसी झड़ी लगाई कि सामने बैठे कलेक्टर साहब के लिए शायद कोई रास्ता ही नहीं बचा था। बैठक में जिले की व्यवस्थाओं से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ गरीबों से कथित वसूली की बात भी प्रमुखता से उठाई गई। पूर्व मंत्री का आरोप था कि जिले में गरीबों के साथ जमकर लूट चल रही है और बिना पैसा दिए अफसरों से काम करवाना मुश्किल हो गया है। यानी जिस ईमानदारी और सख्त कार्यशैली को लेकर कलेक्टर साहब की चर्चा हो रही थी, उसी के बीच बैठक में पूर्व मंत्री ने जमीनी स्तर की व्यवस्थाओं और आम लोगों की परेशानियों को सामने रख दिया। इससे बैठक का माहौल भी काफी गरम हो गया बताया जाता है।
पूरी बैठक में पूर्व मंत्री द्वारा अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए जाने के बाद कलेक्टर साहब की स्थिति चर्चा का विषय बन गई। साहब चुपचाप सबकुछ सुनते रहे और नेता जी अपनी बात बेबाकी से रखते रहे। मामला सिर्फ किसी एक अधिकारी या एक शिकायत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जिले में गरीबों के साथ कथित वसूली और बिना पैसे काम नहीं होने जैसे आरोपों तक पहुंच गया। अब इस पूरे घटनाक्रम को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कलेक्टर साहब की ईमानदारी और सख्त कार्यशैली के दावों के बीच पूर्व मंत्री की खरी-खरी ने जमीनी व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
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