
सार
उज्जैन के प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को सड़क चौड़ीकरण के लिए दूसरी जगह स्थानांतरित करने का मामला अब राजनीतिक और धार्मिक दोनों स्तरों पर तूल पकड़ चुका है। प्रतिमा को हटाने की कई कोशिशें नाकाम होने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर प्रतिमा को नहीं हटाने की मांग की है। उन्होंने प्रशासन से विस्थापन की योजना बदलने का आग्रह किया है। इस बीच श्रद्धालुओं, संतों और विभिन्न संगठनों का विरोध भी लगातार बढ़ रहा है।
विस्तार
उज्जैन में खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को लेकर चल रहा विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण के बीच प्रतिमा को दूसरी जगह ले जाने की कोशिश की जा रही थी, लेकिन भारी मशीनरी और तकनीकी प्रयासों के बावजूद प्रतिमा अपने स्थान से नहीं हिली। करीब आठ फीट ऊंची प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से हटाने के लिए विशेषज्ञों की मदद भी ली जा रही है। IIT इंदौर से भी तकनीकी सलाह ली गई है, ताकि प्रतिमा और उसके आधार की स्थिति को समझने के बाद ही आगे की प्रक्रिया तय की जा सके।
प्रतिमा को हटाने की कोशिशों के बीच श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ रही है। संत समाज और हिंदू संगठनों की ओर से भी प्रतिमा को उसी स्थान पर बनाए रखने की मांग की जा रही है। श्रद्धालु इसे आस्था का विषय बता रहे हैं, जबकि प्रशासन के सामने सड़क चौड़ीकरण और धार्मिक भावनाओं के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है। हालांकि प्रतिमा के नहीं हिलने को लेकर भक्तों की ओर से चमत्कार की मान्यता व्यक्त की जा रही है, लेकिन इसके तकनीकी कारणों का अंतिम निष्कर्ष विशेषज्ञ जांच के बाद ही सामने आएगा।
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इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने खड़े हनुमान की प्रतिमा को नहीं हटाने और विस्थापन की योजना को बदलने का सुझाव दिया है। उमा भारती की इस पहल के बाद मामला राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण हो गया है।
प्रशासन की ओर से भी अब संवाद के जरिए समाधान निकालने की बात कही गई है। बढ़ते विरोध के बीच प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि संबंधित पक्षों की सहमति और संवाद के बिना प्रतिमा को हटाने की कार्रवाई नहीं की जाएगी। ऐसे में अब नजर इस बात पर है कि सड़क चौड़ीकरण की योजना में क्या बदलाव किया जाता है और खड़े हनुमान की प्रतिमा के संरक्षण को लेकर प्रशासन क्या अंतिम फैसला लेता है।
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