
पन्ना, 2 अक्टूबर 2026। केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर मध्य प्रदेश के पन्ना में ग्रामीणों का ‘चिता आंदोलन’ एक बार फिर तेज हो गया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, यह आंदोलन 20वें दिन में पहुंच चुका है। प्रदर्शनकारी मुआवजा, पुनर्वास और विस्थापन से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध कर रहे हैं। बारिश और जलभराव के बीच आंदोलन जारी है। प्रदर्शनकारियों और प्रशासन के बीच तनाव की स्थिति भी सामने आई है।
क्या है चिता आंदोलन और क्यों हो रहा विरोध?
केन-बेतवा लिंक परियोजना का उद्देश्य केन नदी के पानी को बेतवा नदी तक पहुंचाकर बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता बढ़ाना है। केंद्र सरकार के अनुसार, परियोजना से करीब 10.62 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई और लगभग 62 लाख लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। परियोजना में 103 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन का भी प्रावधान है।
परियोजना से जुड़े बांध और अन्य निर्माण कार्यों के कारण पन्ना और छतरपुर के कई गांवों के प्रभावित होने की बात सामने आई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें अपनी जमीन, घर और आजीविका से जुड़े नुकसान के बदले पर्याप्त मुआवजा और उचित पुनर्वास नहीं मिला है। इसी मांग को लेकर अलग-अलग समय पर जल सत्याग्रह, चिता आंदोलन और अन्य प्रतीकात्मक विरोध किए गए हैं।
‘चिता आंदोलन’ में प्रदर्शनकारी प्रतीकात्मक चिताओं पर बैठकर या लेटकर अपना विरोध दर्ज कराते हैं। इसका उद्देश्य विस्थापन के बाद अपने घर और जमीन खोने की स्थिति को गंभीरता से सामने रखना है। हालिया आंदोलन में प्रदर्शनकारियों ने बारिश और जलभराव के बीच भी अपना विरोध जारी रखा है।
यह भी पढ़े: मुंबई के पायलट स्मित मच्छार की बहादुरी की चर्चा, 174 यात्रियों की जान बचाने के बाद उठी अशोक चक्र की मांग
20वें दिन भी जारी आंदोलन, पुलिस कार्रवाई के आरोप
टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर आंदोलन से जुड़े हुए हैं और उन्होंने आंदोलन के दौरान प्रशासन पर प्रदर्शनकारियों के साथ सख्ती बरतने के आरोप लगाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भटनागर ने कई दिनों से भूख हड़ताल भी की और बुधवार को उनकी गिरफ्तारी हुई। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर लाठीचार्ज और महिलाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोप लगाए हैं। इन आरोपों पर प्रशासन का पक्ष भी महत्वपूर्ण है और पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।
दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने हाल ही में उन मीडिया रिपोर्टों को गलत और भ्रामक बताया था, जिनमें प्रभावित परिवारों को मुआवजा और पुनर्वास नहीं मिलने की बात कही गई थी। सरकार के अनुसार, अधिकांश पात्र परिवारों को मुआवजा और पुनर्वास लाभ दिए जा चुके हैं और कुछ मामलों में केवल प्रक्रियात्मक औपचारिकताएं बाकी हैं। सरकार ने यह भी बताया कि जुलाई 2026 तक पुनर्वास के लिए चिन्हित 5,039 प्रभावित परिवारों के लिए ₹629.87 करोड़ के पुरस्कार स्वीकृत हुए थे, जिनमें से ₹590.74 करोड़ का भुगतान किया जा चुका था।
यानी ग्रामीणों के आरोप और सरकारी दावे अलग-अलग हैं। प्रदर्शनकारी मुआवजे और पुनर्वास को लेकर अपनी मांगों पर कायम हैं, जबकि सरकार का कहना है कि पात्र परिवारों को निर्धारित लाभ दिए जा रहे हैं। इसी विवाद के बीच पन्ना में चिता आंदोलन फिर चर्चा में है।
परियोजना से जुड़े बड़े सवाल
केन-बेतवा परियोजना को सरकार बुंदेलखंड के लिए सिंचाई और पेयजल की जरूरतों से जोड़ती है। वहीं प्रभावित ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों की चिंता जमीन, घर, आजीविका, पुनर्वास और पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर है। परियोजना का एक हिस्सा पन्ना टाइगर रिजर्व से जुड़े क्षेत्र को भी प्रभावित करता है, जिसके कारण पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण को लेकर भी बहस होती रही है।
पन्ना में दोबारा शुरू हुआ आंदोलन अब केवल मुआवजे के सवाल तक सीमित नहीं दिख रहा है। ग्रामीण अपनी जमीन और पुनर्वास से जुड़े मुद्दों पर प्रशासन से स्पष्ट समाधान की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, सरकार परियोजना के विकासात्मक लाभ और प्रभावित परिवारों के लिए मुआवजा एवं पुनर्वास प्रक्रिया को लेकर अपने आंकड़े सामने रख रही है। ऐसे में आगे की स्थिति प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत तथा लंबित मामलों के समाधान पर निर्भर करेगी।
यह भी पढ़े: अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस 2 अक्टूबर: जानें इतिहास, महत्व और महात्मा गांधी से जुड़ा संबंध
- panna-chita-andolan-ken-betwa-project








