
शैलेन्द्र चौरसिया | रामनगर, मैहर, 6 अक्टूबर 2026। अमरपाटन वन परिक्षेत्र में बांस भीरा से जुड़े कार्यों की जानकारी सूचना के अधिकार के तहत मांगने के बाद भी उपलब्ध नहीं होने का मामला सामने आया है। आवेदक के अनुसार 7 अगस्त 2026 को RTI आवेदन देकर बांस भीरा की सफाई से जुड़े कार्यों और अभिलेखों की जानकारी मांगी गई थी। प्रथम अपील के बाद भी जानकारी नहीं मिलने का दावा किया जा रहा है। अब आवेदक के सामने राज्य सूचना आयोग के समक्ष द्वितीय अपील का विकल्प है।
बांस भीरा की सफाई से जुड़े रिकॉर्ड मांगे गए
मामले में आवेदक ने अमरपाटन वन परिक्षेत्र के अंतर्गत बांस भीरा से जुड़े कार्यों की जानकारी RTI के माध्यम से मांगी है। इसमें कूपवार और कक्षवार सफाई कार्य, स्वीकृति, मस्टर रोल, मजदूरी भुगतान और संबंधित विभागीय अभिलेखों की जानकारी शामिल होने की बात कही गई है।
आवेदक का कहना है कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन और प्रथम अपील किए जाने के बावजूद मांगी गई जानकारी अभी तक उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके चलते अब विभागीय प्रक्रिया और रिकॉर्ड उपलब्ध कराने में हो रही देरी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना संभव नहीं है कि संबंधित अभिलेखों में कोई अनियमितता है। रिकॉर्ड सामने आने और उनकी जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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रेंजर की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
मामले में अमरपाटन वन परिक्षेत्र के रेंजर प्रफुल्ल त्रिपाठी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में रेंजर की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आवेदक की मांग है कि बांस भीरा से संबंधित सभी रिकॉर्ड नियमानुसार उपलब्ध कराए जाएं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किन कार्यों को स्वीकृति मिली, कितना काम कराया गया और मजदूरी भुगतान किस आधार पर किया गया।
यदि सूचना उपलब्ध नहीं होती है तो आवेदक राज्य सूचना आयोग के समक्ष द्वितीय अपील या संबंधित वैधानिक उपाय अपना सकता है। RTI Act के तहत आयोग को अपील या शिकायत की सुनवाई के दौरान निर्धारित परिस्थितियों में लोक सूचना अधिकारी पर जुर्माना लगाने का अधिकार है।
25 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान
सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 20 के अनुसार यदि आयोग यह पाता है कि बिना उचित कारण सूचना देने में देरी की गई, गलत या अधूरी जानकारी दी गई, सूचना देने से इनकार किया गया या जानकारी उपलब्ध कराने में बाधा डाली गई, तो संबंधित लोक सूचना अधिकारी पर प्रतिदिन 250 रुपये की दर से जुर्माना लगाया जा सकता है। इसकी अधिकतम सीमा 25 हजार रुपये है। हालांकि, जुर्माना लगाने से पहले संबंधित अधिकारी को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिया जाता है।
अब नजर इस बात पर है कि सूचना आयोग के समक्ष मामला पहुंचने से पहले वन विभाग आवेदक को मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराता है या नहीं। वहीं, यदि मामला आयोग तक पहुंचता है तो बांस भीरा की सफाई से जुड़े रिकॉर्ड और विभागीय जवाब के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
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