जल निगम महाघोटाला, सवालों से भागे प्रबंध संचालक, ‘ब्रांडवाणी समाचार’ के तीखे प्रश्नों पर साधी रहस्यमयी चुप्पी! क्या फर्जी बैंक गारंटी में चल रहा है ‘सबका साथ, सबका विकास’?

विशेष संपादकीय रिपोर्ट – ब्रांडवाणी समाचार भोपाल (मध्य प्रदेश)

मध्य प्रदेश जल निगम में करोड़ों-अरबों रुपये के ‘फर्जी बैंक गारंटी’ घोटाले और ईएनसी संजय कुमार अंधवान व सीए भावना भारती के महा-सिंडिकेट का ऐतिहासिक पर्दाफाश करने के बाद, ब्रांडवाणी समाचार की टीम ने सीधे विभाग के शीर्ष अधिकारी यानी प्रबंध संचालक का दरवाजा खटखटाया। जनता को यह जानने का पूरा हक है कि आखिर 166 करोड़ रुपये (35.80 करोड़ + 130.42 करोड़) से अधिक की फर्जी बैंक गारंटियों के जमा होने और सरकारी खजाने को लूटने की खुली छूट किस अधिकारी के संरक्षण में दी जा रही है।

लेकिन, जब हमारे रिपोर्टर ने इन ज्वलंत सवालों के जवाब मांगे, तो जो तस्वीर सामने आई, वह न केवल हैरान करने वाली है, बल्कि पूरे सिस्टम की मिलीभगत की ओर सीधा इशारा करती है।

सवालों से बचते एमडी और एक सप्ताह की लुकाछिपी

एक कर्तव्यनिष्ठ और निष्पक्ष छवि वाले प्रबंध संचालक महोदय से यह उम्मीद थी कि वे इतने बड़े खुलासे के बाद विभाग का पक्ष स्पष्टता से रखेंगे। परंतु, ब्रांडवाणी समाचार के रिपोर्टर को बाइट देने और मिलने के लिए एमडी महोदय द्वारा पूरे एक सप्ताह तक समय नहीं दिया गया। जब भारी दबाव के बाद बाइट दी भी गई, तो वह महज एक औपचारिकता बनकर रह गई। विभाग की कलई खोलने वाले उन 9 तीखे सवालों पर उन्होंने रहस्यमयी चुप्पी साध ली, जिसका सीधा जवाब मध्य प्रदेश की जनता और ईमानदार करदाता मांग रहे हैं।

वे 9 सवाल, जिनका जवाब देने से जल निगम के एमडी ने किया किनारा:

  1. बैंक गारंटी का जिम्मा किसका? आपके निगम में बैंक गारंटी के संधारण एवं रखरखाव का वास्तविक दायित्व किस अधिकारी अथवा विभाग के पास है?

  2. सीए भावना भारती की रहस्यमयी कुर्सी? वर्तमान में श्रीमती भावना भारती निगम में किस पद पर कार्यरत हैं तथा किन दायित्वों का निर्वहन कर रही हैं?

  3. निजी ईमेल से सरकारी काम क्यों? क्या यह तथ्य सही है कि निगम के बैंक गारंटी सत्यापन संबंधी पत्र भावना भारती जी की व्यक्तिगत/नामजद ईमेल आईडी से प्रेषित किए जाते हैं, जबकि नियमानुसार यह कार्य मुख्य वित्त अधिकारी की आधिकारिक ईमेल आईडी से होना चाहिए?

  4. एनएचएम की रिपोर्ट पर आंखें क्यों मूंदीं? क्या राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से प्राप्त पत्र में घोर लापरवाही अथवा अनैतिक गतिविधियों का उल्लेख किए जाने के पश्चात, आपके स्तर से भावना भारती जी को कोई कारण बताओ नोटिस या स्पष्टीकरण पत्र जारी किया गया था?

  5. दोहरी वेतनवृद्धि का इनाम ? क्या इस बात में कोई सत्यता है कि अरबों का नुकसान कराने वाली भावना भारती जी को विगत 10 वर्षों से लगातार दोहरी वेतनवृद्धि का अवांछित लाभ दिया जा रहा है?

  6. फर्जीवाड़े के बाद भी भुगतान? क्या मेसर्स तीर्था गोपीकॉन प्राइवेट लिमिटेड की बैंक गारंटी के फर्जी पाए जाने और संबंधित बैंक द्वारा इसकी लिखित पुष्टि किए जाने के बावजूद, कंपनी को करोड़ों का भुगतान जारी किया गया?

  7. दोषियों पर कार्रवाई कब? यदि बैंक गारंटी फर्जी होने के बाद भी भुगतान किया गया, तो इस गंभीर आर्थिक अपराध के लिए जिम्मेदार ईएनसी अंधवान सहित संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध अब तक क्या दंडात्मक कार्रवाई की गई है?

  8. 130 करोड़ के फर्जीवाड़े पर ब्लैकलिस्टिंग क्यों नहीं? मेसर्स एमपी बाबरिया (MP Babaria) के 130 करोड़ रुपये की फर्जी बैंक गारंटी का मामला संज्ञान में आने के उपरांत भी कंपनी को अब तक ब्लैकलिस्ट क्यों नहीं किया गया?

  9. सुधारात्मक कदम क्या हैं? आपकी छवि एक निष्पक्ष अधिकारी की है; अतः स्पष्ट करें कि इन समस्त गंभीर प्रकरणों पर आपके द्वारा क्या-क्या ठोस और सुधारात्मक कार्रवाइयां की जा रही है

चुप्पी का अर्थ, क्या भ्रष्टाचार में भी है ‘सबका साथ, सबका विकास’?

इन सुलगते सवालों पर प्रबंध संचालक की चुप्पी क्या यह प्रमाणित नहीं करती कि जल निगम में फर्जी बैंक गारंटियों के इस गोरखधंधे में नीचे से लेकर ऊपर तक ‘सबका साथ, सबका विकास‘ की तर्ज पर मलाई काटी जा रही है? यदि एमडी महोदय और अन्य शीर्ष अफसर पाक-साफ हैं, तो उन्हें कैमरे के सामने आकर ईएनसी संजय कुमार अंधवान और सीए भावना भारती के कारनामों पर अपना पक्ष रखना चाहिए था। सवालों से इस तरह कन्नी काटना यह साबित करता है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है।

सीएम मोहन यादव की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर उठते सवाल

अब नजरें मध्य प्रदेश के मुखिया डॉ. मोहन यादव पर टिकी हैं। मुख्यमंत्री जी मंचों से भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ (शून्य सहिष्णुता) की हुंकार भरते हैं। क्या जल निगम का यह 166 करोड़ से अधिक का ‘महा-घोटाला’ उनके संज्ञान में नहीं है? विपक्ष की खामोशी भी कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

क्या इस महा-सिंडिकेट की जड़ें इतनी गहरी हैं कि ईओडब्ल्यू, सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय भी इन सफेदपोशों के आगे नतमस्तक हैं? क्या राज्य शासन ईओडब्ल्यू से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर ईएनसी अंधवान और भावना भारती को सलाखों के पीछे भेजेगा?

आगे भी जारी रहेंगे खुलासे…

ब्रांडवाणी समाचार की यह खोजी मुहिम यहीं रुकने वाली नहीं है। भ्रष्ट अधिकारियों को चाहे जितना समय काटना हो, काट लें; पत्रावलियां छुपानी हों, छुपा लें सच दबने वाला नहीं है। बहुत जल्द हम जल निगम के इस भ्रष्ट तंत्र पर एक और बड़ा धमाका करने जा रहे हैं। जब तक दोषियों पर एफआईआर दर्ज कर उन्हें जेल नहीं भेजा जाता, ब्रांडवाणी समाचार का यह महासंग्राम अनवरत जारी रहेगा। सच के साथ बने रहिए, पढ़ते रहिए ब्रांडवाणी समाचार।

  • Shruti Soni

    ब्रांडवाणी समाचार

    अनुभवी पत्रकार। हर दिन ताज़ा और सटीक खबरों के साथ आपकी सेवा में। निष्पक्ष रिपोर्टिंग और गहराई से तथ्य प्रस्तुत करना मेरी पहचान है।

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