
उमरिया। जिले के जनपद पंचायत पाली अंतर्गत ग्राम पंचायत खोलखम्हरा में रेलवे कोल यार्ड निर्माण के नाम पर बड़े पैमाने पर मिट्टी के कथित अवैध उत्खनन का मामला सामने आया है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि जेसीबी और पोकलेन मशीनों की मदद से निजी और शासकीय जमीनों से हजारों डंपर मिट्टी निकाली जा रही है। ग्रामीणों का दावा है कि कई खेतों में 10 से 15 फीट तक गहरे गड्ढे हो गए हैं। उनका आरोप है कि इस गतिविधि में वैध अनुमति, रॉयल्टी और परिवहन दस्तावेजों का पालन नहीं किया जा रहा है।
रेलवे यार्ड के लिए मिट्टी कहां से आ रही है, उठे सवाल
ग्रामीणों के अनुसार खोलखम्हरा से निकाली जा रही मिट्टी को बांधवबारा रेलवे स्टेशन पर निर्माणाधीन कोल यार्ड में पहुंचाया जा रहा है। इसको लेकर सबसे बड़ा सवाल मिट्टी के स्रोत और उसके दस्तावेजों को लेकर उठ रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि यह स्पष्ट किया जाए कि मिट्टी किस जमीन से निकाली जा रही है, संबंधित जमीन के लिए अनुमति किसके नाम है और प्रत्येक वाहन के पास रॉयल्टी पर्ची व ट्रांजिट परमिट मौजूद है या नहीं।
उमरिया जिले में अवैध खनिज उत्खनन और परिवहन के मामलों में प्रशासन पहले भी कार्रवाई कर चुका है। हाल ही में बिना वैध टीपी के रेत परिवहन के मामले में दो ट्रैक्टर जब्त किए गए थे।
खेतों में 15 फीट तक गहरे गड्ढे होने का दावा
ग्रामीणों का कहना है कि कुछ खेतों से मशीनों के जरिए बड़ी मात्रा में मिट्टी निकाली गई है। आरोप है कि कई स्थानों पर खुदाई इतनी गहरी है कि खेत तालाबनुमा गड्ढों में बदल गए हैं। इससे खेती योग्य जमीन के भविष्य को लेकर किसानों में चिंता है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि निजी खेतों से मिट्टी निकालने की अनुमति दी गई है तो उसकी शर्तों और स्वीकृत मात्रा की जांच होनी चाहिए। वहीं, यदि शासकीय भूमि से उत्खनन हुआ है तो संबंधित विभाग को इसकी वैधता की जांच करनी चाहिए।
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खनिज, राजस्व और रेलवे की भूमिका की जांच की मांग
मामले में खनिज और राजस्व विभाग के साथ रेलवे निर्माण एजेंसी की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इतने बड़े स्तर पर डंपरों की आवाजाही के बावजूद अब तक उत्खनन की वास्तविक मात्रा, भूमि का स्वामित्व और अनुमति की स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र प्रशासनिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। इसलिए पूरे मामले में दस्तावेजों और मौके की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
संयुक्त जांच और कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने कलेक्टर उमरिया और दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, बिलासपुर के महाप्रबंधक से मामले की संयुक्त जांच कराने की मांग की है। उनका सुझाव है कि खनिज, राजस्व और रेलवे की संयुक्त टीम मौके का निरीक्षण करे। साथ ही सैटेलाइट तस्वीरों, मशीनों की गतिविधियों और डंपरों की संख्या के आधार पर निकाली गई मिट्टी की मात्रा का आकलन किया जाए।
ग्रामीणों ने मांग की है कि यदि जांच में अवैध उत्खनन या बिना अनुमति परिवहन की पुष्टि होती है तो नियमानुसार रॉयल्टी और जुर्माना वसूला जाए तथा जिम्मेदार लोगों और वाहनों पर कार्रवाई की जाए। फिलहाल पूरे मामले में प्रशासनिक जांच और संबंधित विभागों का पक्ष सामने आना बाकी है।
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