करोड़ों का गबन और शासन की ‘चुप्पी’: आखिर कौन बचा रहा है डॉ. धीरेंद्र कुमार पांडेय को?

सैकड़ों शिकायतों और पुख्ता सबूतों के बाद भी जांच के आदेश न मिलना प्रशासन की नीयत पर बड़ा सवाल!

विशेष संवाददाता, भोपाल

भोपाल। मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस‘ का दावा करने वाली सरकार की साख पर अब सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। मामला डॉ. धीरेंद्र कुमार पांडेय से जुड़ा है, जिनके खिलाफ करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी धन के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगे हैं। हैरानी की बात यह है कि लोकायुक्त, EOW और विभाग के प्रमुख सचिव तक लिखित शिकायतें और प्रमाणित दस्तावेज पहुंचने के बावजूद, अब तक जांच की एक ईंट भी नहीं हिली है।

अकर्मण्यता या संरक्षण? जनता पूछ रही सवाल सपाक्स पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष पीयूष प्रताप सिंह द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार, डॉ. पांडेय पर सरकारी खजाने को लगभग 100 करोड़ रुपये का चूना लगाने का आरोप है। नियमों को ताक पर रखकर व्यक्तिगत लाभ लेना और प्रशासनिक कार्यों में अवरोध पैदा करना उनकी कार्यशैली का हिस्सा बन चुका है। बावजूद इसके, शासन की ओर से दिखाई जा रही ‘सुस्ती‘ यह संकेत दे रही है कि या तो सिस्टम पूरी तरह ढीला है, या फिर डॉ. पांडेय को किसी बड़े रसूखदार का संरक्षण प्राप्त है।

शिकायतकर्ता की चेतावनी: अब सीधे कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे शिकायतकर्ता पीयूष प्रताप सिंह ने साफ कर दिया है कि वे पिछले एक साल से निरंतर अनुस्मारक (Reminder) भेज रहे हैं, लेकिन प्रशासन कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि आगामी एक माह में ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) दायर करेंगे।

“जब भ्रष्टाचार के प्रमाण मेज पर रखे हों और फिर भी कार्रवाई न हो, तो यह लोकतंत्र और प्रदेश की जनता के साथ सीधा छलावा है। भ्रष्टाचारियों को पालने वाला प्रशासन खुद भी उतना ही दोषी है।” 

  • gaurav singh rajput

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