
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ चल रही कूटनीतिक प्रक्रिया को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि वे औपचारिक रूप से वार्ता का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन “इनडायरेक्टली” बातचीत में शामिल रहेंगे। ट्रम्प के अनुसार पिछले वर्ष ईरान के परमाणु ठिकानों पर हुई बमबारी के बाद तेहरान को “कठोर संदेश” मिला और अब वह वार्ता के लिए तैयार हुआ है।
ट्रम्प ने यह भी कहा कि उनकी सख्त नीतियों और सैन्य दबाव की रणनीति ने ईरान को बातचीत की मेज पर लाने में भूमिका निभाई। उनका दावा है कि यदि अमेरिका कड़ा रुख नहीं अपनाता तो ईरान परमाणु कार्यक्रम को और आगे बढ़ा सकता था। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वे किस माध्यम से वार्ता में अप्रत्यक्ष भूमिका निभाएंगे, लेकिन संकेत दिया कि उनकी टीम और समर्थक कूटनीतिक चैनलों के संपर्क में हैं।
ईरान परमाणु मुद्दे पर आज स्विट्जरलैंड में अहम बैठक प्रस्तावित है, जिसमें पश्चिमी देशों और ईरान के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इस बैठक को क्षेत्रीय स्थिरता और परमाणु कार्यक्रम नियंत्रण के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के अनुसार अमेरिका की आंतरिक राजनीति और पूर्व नेतृत्व की टिप्पणियां भी इस वार्ता के माहौल को प्रभावित कर सकती हैं।
मध्य-पूर्व की सुरक्षा स्थिति, प्रतिबंधों और परमाणु कार्यक्रम को लेकर लंबे समय से तनाव बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी संभावित समझौते के लिए विश्वास निर्माण और निगरानी तंत्र अहम होंगे। ट्रम्प के बयान से यह भी संकेत मिलता है कि ईरान मुद्दा अमेरिकी राजनीति में अभी भी प्रमुख चुनावी और रणनीतिक विषय बना हुआ है।









