
राज्य काडर के एक वरिष्ठ IAS अधिकारी इन दिनों अपने ही सहयोगी अफसरों के रवैये से खिन्न बताए जा रहे हैं। मामला किसी ट्रांसफर, फाइल या प्रशासनिक विवाद का नहीं, बल्कि फोन कॉल रिस्पॉन्स से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, यह अधिकारी फिलहाल केंद्र के एक अत्यंत प्रभावशाली कार्यालय में डेप्युटेशन पर तैनात हैं। इसके बावजूद उनके अपने ही राज्य के कई अधिकारी उनके फोन कॉल उठाने या वापस कॉल करने में उदासीनता दिखा रहे हैं। लगातार अनसुना किए जाने की स्थिति ने उन्हें इतना परेशान कर दिया कि उन्होंने इस मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठाने का फैसला किया।
बताया जाता है कि संबंधित अधिकारी ने राज्य के युवा IAS अधिकारियों के आरआर (रिक्रूट) व्हाट्सएप ग्रुप में एक “दोस्ताना सलाह” जारी की। संदेश में उन्होंने स्पष्ट लिखा कि जब भी किसी का कॉल आए तो उसे अवश्य रिसीव किया जाना चाहिए, खासकर उन युवा अधिकारियों को जो कलेक्टर जैसी जिम्मेदार भूमिका में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने अनुभव का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने सात अधिकारियों को कॉल किया, जिनमें से केवल दो ने कॉल रिसीव किया और एक ने बाद में कॉल बैक किया। इस उदाहरण के जरिए उन्होंने संकेत दिया कि प्रशासनिक तंत्र में संचार शिष्टाचार और उपलब्धता की संस्कृति कमजोर पड़ रही है।
इस संदेश के बाद ग्रुप में हल्की-फुल्की प्रतिक्रिया भी देखने को मिली। माहौल को हल्का करने के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी ने मज़ाकिया अंदाज में पूछा कि क्या इस विषय पर कोई अध्ययन किया जा रहा है। इस पर सलाह देने वाले अधिकारी का जवाब और भी दिलचस्प बताया जा रहा है। उन्होंने हास्यपूर्ण लहजे में कहा—“मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ।” यह टिप्पणी अब अफसरशाही के गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है और इसे प्रशासनिक संस्कृति में बदलते व्यवहार का प्रतीक माना जा रहा है।







