
प्रदेश की नौकरशाही में इन दिनों एक वरिष्ठ IAS अधिकारी की संभावित दिल्ली पोस्टिंग को लेकर हलचल तेज है। पावर कॉरिडोर में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि लंबे अनुभव और प्रशासनिक पकड़ के लिए जाने जाने वाले यह अधिकारी जल्द ही प्रदेश छोड़कर केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, अधिकारी स्वयं भी लंबे समय से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के इच्छुक रहे हैं और अब परिस्थितियां उनके पक्ष में बनती दिखाई दे रही हैं।
चर्चाओं के पीछे एक अहम वजह राज्य सरकार के साथ उनके समीकरणों में आई खटास को भी माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ समय में राज्य स्तर पर बड़े और प्रभावशाली पदों की नियुक्तियों में उन्हें अपेक्षित अवसर नहीं मिल पाए। ऐसे में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि राज्य सरकार भी उन्हें केंद्र में भेजने के विकल्प पर सहमत हो सकती है। प्रशासनिक हलकों में इसे “विन-विन” स्थिति के रूप में देखा जा रहा है—जहां अधिकारी को दिल्ली में मौका और राज्य को आंतरिक संतुलन मिलता है।
दिल्ली की नौकरशाही में जगह बनाना इस अधिकारी की पुरानी आकांक्षा बताई जाती है। कहा जा रहा है कि केंद्र में कई मंत्रालयों और महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स में अनुभवी अफसरों की जरूरत को देखते हुए उनका नाम उपयुक्त माना जा रहा है। हालांकि आधिकारिक स्तर पर अभी कोई आदेश या पुष्टि सामने नहीं आई है, लेकिन चर्चाओं की तीव्रता से संकेत मिल रहे हैं कि फाइलें आगे बढ़ चुकी हैं और निर्णय जल्द संभव है।
इस घटनाक्रम ने प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में नए फेरबदल की अटकलों को भी जन्म दे दिया है। यदि यह अधिकारी केंद्र जाते हैं तो उनके स्थान पर राज्य में नई नियुक्ति और शक्ति संतुलन का समीकरण बदल सकता है। कुल मिलाकर, अनुभवी IAS के संभावित दिल्ली गमन ने प्रदेश और केंद्र—दोनों स्तरों पर नौकरशाही के समीकरणों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है, और सभी की निगाहें अब औपचारिक आदेश पर टिकी हैं।







