
टीकमगढ़/ धर्मेंद्र: जिले की पलेरा तहसील के ग्राम रतनवा में करीब 100 साल पुराने आम रास्ते पर कथित कब्जे का मामला सामने आया है। आदिवासी परिवारों का आरोप है कि कुछ लोगों ने रास्ते को जोतकर उसमें बुवाई कर दी और बाड़ व तार लगाकर मार्ग को पूरी तरह बंद कर दिया। इससे गांव के दर्जनों परिवारों का अपने खेतों और वहां बने मकानों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।
राजस्व अभिलेखों में दर्ज होने का दावा
ग्रामीणों के अनुसार, यह रास्ता राजस्व अभिलेखों में दर्ज है और कई दशकों से करीब 500 लोगों के आवागमन का प्रमुख माध्यम रहा है। इसी रास्ते से ग्रामीण ट्रैक्टर, मोटरसाइकिल, कृषि उपकरण और मवेशियों को लेकर खेतों तक आते-जाते रहे हैं। आरोप है कि कुछ लोगों ने कथित रूप से रास्ते पर कब्जा कर उसे निजी भूमि की तरह उपयोग करना शुरू कर दिया है।
खेतों तक पहुंच बंद होने से खेती प्रभावित
पीड़ित आदिवासी परिवारों का कहना है कि रास्ता बंद होने के कारण वे अपने खेतों और वहां बने मकानों तक आसानी से नहीं पहुंच पा रहे हैं। इससे खेती-किसानी का काम प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि रास्ता खाली कराने की मांग करने पर उन्हें गाली-गलौज और धमकी का सामना करना पड़ता है।
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ग्रामीणों ने जगभान राजपूत, बाली राजपूत, आशा राजपूत और सीमा राजपूत पर रास्ता बंद करने का आरोप लगाया है। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
एसडीएम और पुलिस से शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप
ग्रामीण मातादीन आदिवासी सहित अन्य पीड़ितों का कहना है कि मामले की शिकायत एसडीएम कार्यालय और थाना खरगापुर में की गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत के बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उनका यह भी दावा है कि थाना स्तर पर उनका आवेदन तक स्वीकार नहीं किया गया।
मुख्यमंत्री और पुलिस अधिकारियों से लगाई न्याय की गुहार
पीड़ित परिवारों ने मुख्यमंत्री, पुलिस महानिदेशक और जिला प्रशासन से मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों की मांग है कि राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम मौके पर पहुंचकर रास्ते की जांच करे। यदि आम रास्ते पर अवैध कब्जा पाया जाता है, तो उसे हटाकर ग्रामीणों का आवागमन बहाल किया जाए।
ग्रामीणों ने संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई और सुरक्षा उपलब्ध कराने की भी मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो आदिवासी परिवारों के सामने आवागमन के साथ-साथ खेती और आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
- Allegation of encroachment on a 100-year-old tribal path








