
शिवपुरी/ कुलदीप शर्मा: जिले की करैरा तहसील के अमोला थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत थरखेड़ा में आदिवासी परिवारों ने राजस्व अधिकारियों पर पट्टा भूमि से बेदखल करने और खड़ी फसल उजाड़ने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित परिवारों का कहना है कि वर्षों की मेहनत से तैयार की गई उनकी फसल को चार जेसीबी और चार ट्रैक्टरों की मदद से नष्ट कर दिया गया। इतना ही नहीं, उनकी झोपड़ियां भी तोड़ दी गईं। मामले को लेकर पीड़ित आदिवासी परिवारों ने कलेक्टर जनसुनवाई में आवेदन देकर न्याय और कार्रवाई की मांग की है।
पट्टा भूमि पर वर्षों से कर रहे थे खेती
पीड़ित परिवारों के अनुसार वे अनुसूचित जनजाति वर्ग से आते हैं और लंबे समय से शासन द्वारा आवंटित पट्टा भूमि पर खेती कर अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं। उनका दावा है कि उनके पास पट्टा भूमि से संबंधित दस्तावेज और राजस्व अभिलेख भी मौजूद हैं। इसी भूमि पर उन्होंने मेहनत कर फसल तैयार की थी।
चार जेसीबी और ट्रैक्टरों से फसल उजाड़ने का आरोप
आदिवासी परिवारों का आरोप है कि 10 जुलाई 2026 को राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी में उनकी पट्टा भूमि पर कार्रवाई की गई। इस दौरान चार जेसीबी मशीनों और चार ट्रैक्टरों की मदद से खेतों में खड़ी फसल को उजाड़ दिया गया। पीड़ितों के अनुसार कार्रवाई के दौरान उनकी झोपड़ियों को भी ध्वस्त कर दिया गया और उन्हें जमीन से बेदखल कर दिया गया।
दस्तावेज दिखाने के बाद भी नहीं सुनी बात
पीड़ित परिवारों का कहना है कि उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को अपने पट्टा दस्तावेज और भूमि संबंधी रसीदें दिखाईं, लेकिन उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया गया। आरोप है कि कार्रवाई का विरोध करने पर पुलिस बल का इस्तेमाल किया गया और उन्हें जेल भेजने की धमकी भी दी गई।
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कलेक्टर से लगाई न्याय की गुहार
कार्रवाई से परेशान आदिवासी परिवार अब कलेक्टर जनसुनवाई में पहुंचे और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। पीड़ितों ने दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई, अपनी पट्टा भूमि का कब्जा वापस दिलाने तथा नष्ट की गई फसल और तोड़ी गई झोपड़ियों का उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है।
अब देखना होगा कि कलेक्टर जनसुनवाई में दिए गए आवेदन के बाद प्रशासन इस पूरे मामले की जांच किस स्तर पर कराता है और पीड़ित आदिवासी परिवारों को उनकी जमीन और नुकसान का न्याय मिल पाता है या नहीं।
- Allegations of eviction from leased land; victims approach the Collector's court seeking justice








