
दतिया/सेवढ़ा (संतोष चंसौलिया की रिपोर्ट): जनपद पंचायत सेवढ़ा के अंतर्गत ग्राम पंचायत बघाउली की पहाड़ियों में जेसीबी मशीनों से खंडा और मुरम के कथित उत्खनन का मामला सामने आया है। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार पहाड़ी क्षेत्र में मशीनों से खुदाई कर खनिज सामग्री निकाली जा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यह उत्खनन वैध अनुमति के तहत हो रहा है या बिना अनुमति के।
मामले में सबसे अहम सवाल उत्खनन की अनुमति, भूमि की स्थिति और संबंधित विभाग की जिम्मेदारी को लेकर है। यदि खंडा और मुरम का उत्खनन वैध है तो संबंधित लीज, अनुमति और स्वीकृति के दस्तावेज सामने आना जरूरी है। वहीं यदि बिना अनुमति उत्खनन हो रहा है तो जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
पंचायत सचिव ने उत्खनन से किया इनकार
ग्राम पंचायत बघाउली के पंचायत सचिव प्रथम सिंह चौहान ने बताया कि पंचायत के पास उत्खनन से संबंधित लीज के कोई दस्तावेज नहीं आए हैं और पंचायत द्वारा भी यह काम नहीं कराया जा रहा है। उनके बयान के बाद यह सवाल और महत्वपूर्ण हो गया है कि पहाड़ी क्षेत्र में चल रही जेसीबी मशीनों को किसकी अनुमति प्राप्त है।
वन विभाग बोला- राजस्व क्षेत्र में आता है इलाका
मामले को लेकर वन विभाग के बीट प्रभारी हरिओम अहिरवार ने बताया कि संबंधित क्षेत्र वन विभाग की रेंज में नहीं आता, बल्कि राजस्व क्षेत्र में है। ऐसे में अब संबंधित भूमि का राजस्व रिकॉर्ड, स्वामित्व और खनिज उत्खनन से जुड़ी अनुमति की जांच महत्वपूर्ण हो गई है।
पटवारी से संपर्क नहीं हो सका
राजस्व रिकॉर्ड और भूमि की स्थिति की जानकारी लेने के लिए संबंधित हल्का पटवारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका मोबाइल फोन स्विच ऑफ मिला। ऐसे में फिलहाल खसरा नंबर, भूमि की प्रकृति और स्वामित्व से संबंधित जानकारी सामने नहीं आ सकी।
तहसीलदार ने तत्काल जानकारी देने में जताई असमर्थता
मामले को लेकर तहसीलदार राजेंद्र जाटव से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि वह फिलहाल अपनी पत्नी के अस्पताल में भर्ती होने के कारण विस्तृत जानकारी नहीं दे पा रहे हैं। ऐसे में मामले की राजस्व स्थिति को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
खनिज अधिकारी ने जांच की बात कही
जिला खनिज अधिकारी बघेल ने मामले को लेकर कहा कि वे अभी नए पदस्थ हुए हैं और मामले को दिखवाएंगे। अब निगाहें खनिज विभाग की जांच पर टिकी हैं। विभागीय जांच के दौरान मौके का निरीक्षण, उत्खनन क्षेत्र की माप, अनुमति दस्तावेज और निकाली गई खनिज सामग्री की मात्रा की जांच महत्वपूर्ण होगी। मध्यप्रदेश में खनिज मुरम के अवैध उत्खनन के मामलों में खनिज विभाग द्वारा कार्रवाई और जब्ती की प्रक्रिया के उदाहरण सामने आते रहे हैं।
एसडीएम ने माइनिंग विभाग से संपर्क करने को कहा
मामले को लेकर एसडीएम से जानकारी लेने पर उन्होंने माइनिंग विभाग से बात करने की बात कही। इससे अब पूरे मामले में खनिज विभाग की जांच और कार्रवाई की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।
किसकी अनुमति से चल रही जेसीबी?
बघाउली की पहाड़ियों में कथित उत्खनन को लेकर फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि वहां जेसीबी मशीनें किसकी अनुमति से चल रही हैं। यदि उत्खनन वैध है तो संबंधित लीज और अनुमति के दस्तावेज सार्वजनिक किए जाने चाहिए। यदि अनुमति नहीं है तो उत्खनन पर रोक लगाकर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
मामले की निष्पक्ष जांच के लिए मौके का भौतिक निरीक्षण, राजस्व रिकॉर्ड का सत्यापन, खनिज विभाग से अनुमति एवं लीज दस्तावेजों की जांच तथा उत्खनित क्षेत्र की माप जरूरी है। साथ ही यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि निकाली गई मुरम और खंडा की मात्रा कितनी है और इसे कहां ले जाया जा रहा है। फिलहाल अलग-अलग विभागों से सामने आए बयानों के बीच मामला कई सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना होगा कि खनिज विभाग मौके पर पहुंचकर जांच करता है या नहीं और जांच के बाद उत्खनन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होती है।
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