
उमरिया/राकेश दर्दवंशी की रिपोर्ट: बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में वन विभाग ने एक कमजोर और बीमार नर तेंदुए का सफल रेस्क्यू किया है। करीब 10 वर्ष का यह तेंदुआ मगधी रेंज की रोहनिया बीट में वन गश्ती के दौरान अत्यंत कमजोर हालत में मिला। वन अमले ने उसकी लगातार निगरानी करने के बाद रविवार को पशु चिकित्सकों की मौजूदगी में सुरक्षित रेस्क्यू अभियान चलाया।
वन विभाग के अनुसार, तेंदुआ एक दिन पहले भी उसी क्षेत्र में कमजोर अवस्था में दिखाई दिया था। उसकी स्थिति में सुधार नहीं होने पर प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को मौके पर भेजा गया, जिसने सभी आवश्यक सावधानियों के साथ उसे सुरक्षित पकड़कर रेस्क्यू सेंटर पहुंचाया। रेस्क्यू के बाद वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश तोमर ने तेंदुए का प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण किया। जांच में उसके निचले दाहिने कैनाइन दांत के पूरी तरह घिस जाने और अन्य कैनाइन दांतों के भी काफी घिसे होने की पुष्टि हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि दांत घिस जाने के कारण तेंदुआ प्रभावी ढंग से शिकार नहीं कर पा रहा था, जिससे लंबे समय से पर्याप्त भोजन नहीं मिलने के कारण उसकी शारीरिक स्थिति बेहद कमजोर हो गई।
वन विभाग के अनुसार, लगभग 10 वर्ष की उम्र में तेंदुआ अपने जीवन के अंतिम चरण की ओर बढ़ने लगता है। सामान्य परिस्थितियों में जंगल में तेंदुए 12 से 15 वर्ष तक जीवित रहते हैं। बढ़ती उम्र के साथ उनकी फुर्ती, ताकत और शिकार करने की क्षमता कम होने लगती है। ऐसे में दांत घिस जाने से बड़े शिकार को पकड़ना और उसका मांस खाना कठिन हो जाता है, जिससे कुपोषण और कमजोरी की स्थिति बन सकती है। रेस्क्यू के दौरान तेंदुए के आवश्यक चिकित्सकीय नमूने भी लिए गए हैं। फिलहाल उसे बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के रेस्क्यू सेंटर में विशेषज्ञों की निगरानी में उपचार दिया जा रहा है।
पूरे अभियान के दौरान क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय, वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश तोमर, वन परिक्षेत्र अधिकारी सचिन सिंह सहित वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। वन विभाग ने बताया कि घायल, बीमार और कमजोर वन्यजीवों की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए ऐसे रेस्क्यू अभियान आगे भी जारी रहेंगे।
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