
उमरिया/ राकेश दर्दवंशी: बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के मानपुर बफर क्षेत्र में मृत मिले बाघ का NTCA की मानक कार्यप्रणाली के अनुसार विधिवत अंतिम संस्कार कर दिया गया। बाघ की मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम के दौरान लिए गए विसरा नमूनों को वैज्ञानिक परीक्षण हेतु प्रयोगशाला भेजा गया है। वन विभाग अब जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है।
विस्तार:
वन विभाग के अनुसार, 3 अगस्त को मानपुर बफर परिक्षेत्र की मानपुर बीट में नियमित गश्त के दौरान वन अमले को लगभग 4 से 5 वर्ष आयु के एक बाघ का शव मिला था। सूचना मिलते ही पार्क प्रबंधन ने पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर उसे सुरक्षित किया और रातभर निगरानी रखी गई।
डॉग स्क्वाड और हाथियों की मदद से चला सर्च अभियान
घटना के बाद डॉग स्क्वाड, मेटल डिटेक्टर और हाथियों की सहायता से आसपास के इलाके में व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया। जांच के दौरान घटनास्थल से कोई संदिग्ध वस्तु या अस्वाभाविक सामग्री बरामद नहीं हुई, जिससे फिलहाल किसी स्पष्ट कारण की पुष्टि नहीं हो सकी है।
पोस्टमार्टम में दांत और नाखून सुरक्षित मिले
बाघ का पोस्टमार्टम बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश तोमर तथा संजय टाइगर रिजर्व के वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अभय सेंगर की टीम ने किया। जांच में बाघ के सभी दांत और नाखून सुरक्षित पाए गए। हालांकि शव काफी खराब अवस्था में होने के कारण उसके लिंग की स्पष्ट पहचान नहीं हो सकी। विशेषज्ञों ने उसकी अनुमानित आयु 4 से 5 वर्ष आंकी है।
वैज्ञानिक रिपोर्ट से खुलेगा मौत का राज
पोस्टमार्टम के बाद आवश्यक विसरा नमूनों को सुरक्षित कर वैज्ञानिक परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेज दिया गया है। पूरी प्रक्रिया की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी कराई गई। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद एनटीसीए के दिशा निर्देशों के अनुरूप बाघ का अंतिम संस्कार किया गया।
इस दौरान एनटीसीए के प्रतिनिधि अक्षय दलवी, नायब तहसीलदार, जनप्रतिनिधि तथा बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे। अब वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही बाघ की मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।
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