
बड़वानी: जिले में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की हड़ताल तीसरे दिन भी जारी रही, लेकिन अब यह आंदोलन और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति में पहुंचता नजर आ रहा है। एक ओर अपनी मांगों को लेकर सैकड़ों संविदाकर्मी धरने पर डटे हुए हैं, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए हड़ताल में शामिल कर्मचारियों को सेवा समाप्ति की चेतावनी जारी कर दी है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय द्वारा जारी नोटिस में हड़ताल कर रहे कर्मचारियों को तत्काल कार्यस्थल पर लौटने के निर्देश दिए गए हैं।
विभाग का कहना है कि पहले भी कारण बताओ सूचना पत्र जारी कर कर्मचारियों को ड्यूटी पर लौटने का अवसर दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में कर्मचारी कार्य पर उपस्थित नहीं हुए। इसे संविदा सेवा शर्तों का उल्लंघन मानते हुए विभाग ने आगे की कार्रवाई की चेतावनी दी है। जानकारी के अनुसार नोटिस सूची में अर्बन हेल्थ, डीईआईसी, राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (टीबी), डाटा एंट्री ऑपरेटर, फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स, जिला कार्यक्रम समन्वयक समेत विभिन्न श्रेणियों के 600 से अधिक संविदाकर्मियों के नाम शामिल हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि कर्मचारी हड़ताल समाप्त कर तत्काल कार्य पर उपस्थित नहीं होते हैं तो राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की संविदा मानव संसाधन नीति के तहत उनकी सेवाएं समाप्त की जा सकती हैं।
इस बीच हड़ताल का असर जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दिखाई देने लगा है। विशेष रूप से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। सीएमएचओ डॉ.राजेश गुप्ता ने बताया कि जिले में कुल 768 संविदा कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें से 601 कर्मचारी हड़ताल पर हैं। पाटी ब्लॉक में 80 में से 72 कर्मचारी आंदोलन में शामिल हैं, जबकि निवाली और जिला अस्पताल के संविदाकर्मी भी हड़ताल का हिस्सा बन चुके हैं। डॉ. राजेश गुप्ता के अनुसार मरीजों को परेशानी से बचाने के लिए नियमित कर्मचारियों और वैकल्पिक व्यवस्थाओं के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएं संचालित की जा रही हैं। हालांकि उन्होंने माना कि यदि हड़ताल लंबी चली तो स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में गंभीर चुनौतियां सामने आ सकती हैं।
वहीं जिला मुख्यालय पर चल रहे धरने में शामिल संविदा कर्मचारियों ने विभागीय नोटिस को दबाव बनाने की कोशिश बताया है। आंदोलनकारी कर्मचारियों का कहना है कि वे नियमितीकरण, वेतन विसंगतियों को दूर करने और सेवा सुरक्षा जैसी वर्षों पुरानी मांगों को लेकर प्रदेशव्यापी आंदोलन कर रहे हैं। उनका आरोप है कि कई बार शासन स्तर पर मांगें उठाने के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकला, जिसके कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
धरना स्थल पर मौजूद संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन के बीच नोटिस जारी कर कर्मचारियों को डराने और आंदोलन कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि यह आंदोलन केवल बड़वानी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आगे की रणनीति प्रांतीय नेतृत्व के निर्देशों के अनुसार तय की जाएगी। हड़ताल और विभागीय सख्ती के बीच फिलहाल जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर चिंता बढ़ गई है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि शासन और आंदोलनकारी कर्मचारियों के बीच बातचीत का कोई रास्ता निकलता है या मामला और अधिक गंभीर रूप लेता है।
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